नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मौजूदा हालात पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में जारी घटनाक्रम और मौजूदा संकट को लेकर विस्तार से बातचीत हुई। साथ ही यह भी तय किया गया कि आने वाले समय में दोनों देश स्थिति पर नजर रखते हुए संपर्क बनाए रखेंगे। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने जर्मनी और दक्षिण कोरिया के अपने समकक्षों से भी टेलीफोन पर बातचीत की। भारत मौजूदा हालात को देखते हुए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इन चर्चाओं में ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा भी अहम रहा, क्योंकि ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद करने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह मार्ग दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

जर्मनी के विदेश मंत्री से भी चर्चा
जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल से भी बातचीत की। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि इस दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री से संवाद
इसके बाद जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी फोन पर बातचीत की। इस दौरान भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को मजबूत करने और पश्चिम एशिया के हालात का असर ऊर्जा क्षेत्र पर किस तरह पड़ रहा है, इस पर चर्चा हुई।

दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए उम्मीद जताई कि इस वर्ष होने वाली उच्च स्तरीय मुलाकातें दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेंगी। जानकारी के अनुसार, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग अगले दो महीनों में भारत की यात्रा कर सकते हैं। दोनों नेताओं ने रणनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार संपर्क में बने रहने पर भी सहमति जताई।