रांची: झारखंड में शराब घोटाले की जांच में एसीबी की धीमी प्रगति के बाद एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने मामले की जांच तेज कर दी है। ईडी ने मामले में जुड़े आधा दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों को 12 से 15 मार्च के बीच पूछताछ के लिए समन किया है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह कार्रवाई रांची स्थित अपने जोनल कार्यालय में ईसीआइआर 10/2025 दर्ज करने के बाद की है। यह ईसीआइआर एसीबी के रांची थाने में 20 मई 2025 को दर्ज कांड संख्या 9/2025 के आधार पर बनाई गई थी।

समन किए गए अधिकारी और कर्मचारी

पूछताछ के लिए बुलाए गए अधिकारियों में शामिल हैं:

  • उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन महाप्रबंधक (वित्त) सुधीर कुमार दास

  • झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के तत्कालीन वरिष्ठ लेखापाल नवेंदु शेखर

  • तत्कालीन उच्च वर्गीय लेखापाल अमित कुमार

  • उच्च वर्गीय लिपिक मोहम्मद मोहसीन कमाल राजा

  • सहायक लेखापाल शीतल कुमारी

मामला किससे जुड़ा है

ईडी का ईसीआइआर उत्पाद विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में पद का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक गारंटी देने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों को मैनपावर आपूर्ति का ठेका देने से संबंधित है। आरोपित एजेंसियों में मेसर्स मार्शन इनोवेटिव और मेसर्स विजन शामिल हैं।

एसीबी की कार्रवाई और जांच

एसीबी ने इस घोटाले में अब तक 17 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। हालांकि, चार्जशीट दाखिल न होने के कारण अधिकांश आरोपित डिफॉल्ट बेल पर रिहा हो गए। प्रारंभिक जांच में एसीबी ने यह पाया कि यह मामला सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं था, बल्कि अधिकारियों और निजी कंपनियों की मिलीभगत वाला संगठित तंत्र था।

वित्तीय नुकसान

शुरुआती अनुमान के अनुसार, फर्जीवाड़े से राज्य को करीब 38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा बढ़कर 150 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया। एसीबी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट ने झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया था।