गाजियाबाद: गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। मृतक बच्चियों के पिता पर करीब दो करोड़ रुपये का कर्ज था और घर की हालत बेहद खराब थी। हालात ऐसे थे कि हाल ही में उन्होंने बेटियों का मोबाइल फोन बेचकर फ्लैट की बिजली रिचार्ज कराई थी।

बताया जा रहा है कि आर्थिक तंगी के चलते बच्चियां लंबे समय से स्कूल नहीं जा रही थीं। परिवार में तनाव का माहौल था और पिता द्वारा उनकी शादी की बात कहे जाने से वे मानसिक रूप से परेशान थीं।

इस बीच पिता ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि बच्चियां एक कोरियाई ऑनलाइन गेम खेल रही थीं, जिसमें कथित तौर पर अंतिम टास्क आत्महत्या से जुड़ा था। हालांकि, पुलिस ने शुरुआती जांच में किसी खतरनाक गेम की वजह से मौत होने की बात से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि तीनों बहनें मुख्य रूप से मोबाइल पर कोरियाई सीरियल और ड्रामा देखा करती थीं, जिनका भावनात्मक असर उन पर गहरा हो सकता है।

पुलिस के अनुसार, कुछ समय पहले परिवार ने बच्चियों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल बंद करा दिया था। इससे वे और ज्यादा टूट गई थीं। जांच में सामने आया है कि बच्चियां कोरियाई संस्कृति और कंटेंट से काफी प्रभावित थीं और उन्होंने अपने नाम भी बदलकर मारिया, अलीज़ा और सिंडी रख लिए थे।

परिवारिक विवाद भी जांच के दायरे में

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पारिवारिक हालात ने इस घटना में कितनी भूमिका निभाई। जानकारी के मुताबिक, पिता की दो पत्नियां थीं और कुछ समय से उनकी तीसरी साली भी घर में रह रही थी। इसके बाद दोनों पत्नियां घर छोड़कर चली गईं, जिनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट टीला मोड़ थाने में दर्ज है।

नौवीं मंजिल से कूदकर दी जान

यह दर्दनाक घटना मंगलवार देर रात हुई, जब तीनों बहनों ने नौवीं मंजिल स्थित फ्लैट की बालकनी से छलांग लगा दी। उस समय घर के अन्य सदस्य सो रहे थे। पुलिस ने मौके से सबूत जुटाए हैं और हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है।

एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि बच्चियां एक ‘टास्क-बेस्ड’ कोरियाई ऑनलाइन गेम खेलती थीं, जिसमें अलग-अलग लक्ष्य पूरे करने होते हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आत्महत्या सीधे तौर पर किसी गेम से जुड़ी थी।

मोबाइल और ऑनलाइन कंटेंट की लत

डीसीपी निमिष पाटिल के अनुसार, बच्चियां कोविड-19 के दौरान मोबाइल और ऑनलाइन गेम्स की आदी हो गई थीं। वे हर काम साथ-साथ करती थीं खाना, सोना और समय बिताना। पिछले दो साल से वे स्कूल भी नहीं जा रही थीं और पढ़ाई में उनका प्रदर्शन कमजोर था।

डायरी से मिले अहम सुराग

जांच के दौरान पुलिस को बच्चियों की एक डायरी भी मिली है। उसमें लिखा है-
“इस डायरी में सब कुछ लिखा है, सब पढ़ लेना।”
साथ ही पिता से माफी मांगते हुए भावुक शब्द और रोते हुए चेहरे का चित्र भी बना था।

पिता चेतन कुमार ने बताया कि उनकी बेटियां लगातार कोरिया जाने की बात किया करती थीं। उन्हें इस बात का अंदेशा नहीं था कि ऑनलाइन गेम या कंटेंट बच्चों को इस हद तक प्रभावित कर सकता है। फॉरेंसिक जांच के बाद ही मोबाइल फोन से जुड़े तथ्यों का पता चल पाया।

फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह समझने की कोशिश की जा रही है कि आर्थिक तंगी, पारिवारिक तनाव और डिजिटल कंटेंट के प्रभाव ने मिलकर इस त्रासदी को जन्म दिया या नहीं।