दूषित पानी से इंदौर में 15 लोगों की मौत, उमा भारती बोलीं- यह व्यवस्था पर कलंक

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। कई अन्य लोग भी बीमार बताए जा रहे हैं। मामले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है और विपक्ष के साथ-साथ भाजपा के भीतर से भी सरकार पर सवाल उठने लगे हैं।
उमा भारती का सरकार पर तीखा हमला
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस घटना को प्रदेश की व्यवस्था पर धब्बा बताते हुए सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि साल 2025 के अंत में इंदौर जैसे शहर में गंदा पानी पीने से लोगों की मौत होना पूरे प्रदेश के लिए शर्मनाक है। उमा भारती ने कहा कि जिस शहर को बार-बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया, वहां जहरीला पानी लोगों की जान ले रहा है, यह बेहद दुखद और अस्वीकार्य है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुआवजे की राशि से किसी की जिंदगी की भरपाई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवार जीवन भर इस पीड़ा को झेलते रहेंगे। इस मामले में केवल माफी नहीं, बल्कि गहरे प्रायश्चित और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए।
उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री के लिए अग्निपरीक्षा का समय है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब व्यवस्था इतनी विफल थी, तो सत्ता में बैठे लोग बोतलबंद पानी पीते रहे और जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कोई सफाई काम नहीं आती, या तो दंड होना चाहिए या फिर प्रायश्चित।
कांग्रेस ने बताया व्यवस्था की विफलता
इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीला पानी पीने से हुई मौतें कोई हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा हैं। पटवारी ने कहा कि सत्ता का अहंकार और भ्रष्टाचार सबसे घातक हथियार बन चुके हैं और इन्हीं के कारण निर्दोष लोगों की जान गई है।
पटवारी ने भाजपा नेताओं के बयानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कभी अधिकारियों की कमी तो कभी समन्वय की कमी बताकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग भी की और कहा कि दोषियों को बचाने के बजाय सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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