बीकानेर: सिजेरियन के बाद किडनी फेल, 20 दिन जिंदगी की जंग लड़ने के बाद प्रसूता की मौत

बीकानेर। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के जनाना विंग में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में अब एक और दुखद खबर सामने आई है, जहां फलौदी निवासी प्रसूता प्रीति की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह कई दिनों से आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में कारण मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम और विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। घटना के बाद परिजनों में शोक की लहर है, वहीं अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सिजेरियन के बाद बिगड़ी थी कई प्रसूताओं की हालत
यह मामला जून के पहले सप्ताह का है, जब जनाना विंग में सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद करीब आधा दर्जन महिलाओं की हालत अचानक गंभीर हो गई थी। 20 से 27 वर्ष की इन प्रसूताओं में यूरिन रुकना, प्लेटलेट्स में गिरावट, अत्यधिक रक्तस्राव और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर जटिलताएं सामने आई थीं। सभी को तुरंत आईसीयू में शिफ्ट कर डायलिसिस पर रखा गया था।
इसी दौरान श्रीरामसर निवासी एक अन्य प्रसूता शारदा की हालत भी डिलीवरी के बाद गंभीर हो गई और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। संक्रमण के जोखिम को देखते हुए नवजात को मां से अलग रखा गया, जिसकी देखभाल परिजनों ने आगे आकर की।
मंत्री के बयान पर विवाद
मामले की संवेदनशीलता के बीच अस्पताल पहुंचे चिकित्सा एवं जिला प्रभारी मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के एक बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। पत्रकारों के सवालों के जवाब में उनकी टिप्पणी को असंवेदनशील माना गया, जिस पर बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि मरीज पहले से गंभीर स्थिति में रेफर होकर आई थीं और डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की है।
जांच के लिए विशेषज्ञ टीम सक्रिय
घटना की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर से छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम बीकानेर भेजी गई है। टीम ने गायनी विभाग, आईसीयू और ब्लड बैंक के रिकॉर्ड की जांच कर उपचार प्रक्रिया की समीक्षा की है। अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण की संभावना को देखते हुए नई तकनीक आधारित इंफेक्शन डिटेक्शन सिस्टम लगाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
दो मरीजों को मिली राहत
इसी बीच राहत की बात यह रही कि विशेषज्ञों की निगरानी के बाद दो प्रसूताओं की हालत में सुधार हुआ है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
जांच के बाद ही सामने आएगा सच
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक साथ कई महिलाओं की हालत कैसे बिगड़ी। क्या इसके पीछे संक्रमण, जटिल मेडिकल स्थिति या लापरवाही जिम्मेदार है—इसका जवाब आने वाली जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा।
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