ट्विशा शर्मा केस में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, पूर्व जज के घर पहुंची टीम

भोपाल। पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथ में आने के बाद कार्रवाई तेज हो गई है। मंगलवार को सीबीआई की विशेष टीम भोपाल के कटारा हिल्स स्थित सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के आवास पर पहुंची और मामले से जुड़े सबूतों की जांच शुरू की।
महिला अधिकारियों सहित सीबीआई की टीम के पहुंचने के दौरान बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी भी मौजूद रहे, हालांकि सुरक्षा कारणों से किसी को घर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
CBI ने दर्ज की नई FIR
सीबीआई ने सोमवार को इस मामले को अपने अधीन लेते हुए ट्विशा शर्मा के पति अधिवक्ता समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसी ने राज्य पुलिस की एफआईआर को फिर से रजिस्टर करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं जोड़ी हैं, जिनमें दहेज मृत्यु और क्रूरता से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
ट्विशा शर्मा का शव 12 मई को उनके भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला था।
जांच एजेंसी की सक्रियता बढ़ी
सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट दिल्ली से भोपाल पहुंचकर दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य जुटा रही है। जांच की जिम्मेदारी डीएसपी निशु कुशवाहा को सौंपी गई है। संभावना जताई जा रही है कि सीबीआई जल्द ही अदालत में आरोपी पति समर्थ सिंह की पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है।
परिजनों के आरोप और जांच का दायरा
मृतका के परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद ससुराल पक्ष दहेज से संतुष्ट नहीं था और ट्विशा को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था, जिसके चलते यह घटना हुई।
वहीं, सास गिरिबाला सिंह ने मीडिया में दिए बयानों में ट्विशा की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं, जिससे मामले में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रिया
मामले में एम्स दिल्ली की टीम द्वारा दोबारा पोस्टमार्टम किया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होती है तो जांच उसी आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
CDR और CCTV को लेकर अहम याचिका
परिजनों ने अदालत में आवेदन देकर मांग की है कि घटना के बाद के दिनों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और घर के साथ-साथ अस्पताल ले जाने के दौरान के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए। अदालत में इस मामले पर सुनवाई भी प्रस्तावित है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, CDR और CCTV फुटेज इस केस में निर्णायक साक्ष्य साबित हो सकते हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है।
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