सिरप से हुई मौतों पर केंद्र सख्त, राज्यों के साथ स्वास्थ्य सचिव की बैठक

मध्य प्रदेश और राजस्थान में खांसी की दवा से बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने की, जिसमें दवाओं की गुणवत्ता, बच्चों में खांसी की दवाओं के सुरक्षित उपयोग और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा की गई।
कफ सिरप की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी के निर्देश
बैठक में राज्यों को संशोधित शेड्यूल एम के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले दवा निर्माताओं के लाइसेंस तुरंत रद्द करने के निर्देश दिए गए। केंद्र ने जोर दिया कि अधिकतर खांसी अपने आप ठीक हो जाती है, इसलिए बच्चों को बिना जरूरत खांसी की दवा देने से बचा जाए।
इसके साथ ही सभी राज्यों को निगरानी प्रणाली को मजबूत करने, आईडीएसपी-आईएचआईपी रिपोर्टिंग टूल का सक्रिय उपयोग बढ़ाने और दवा सुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान करने की सलाह दी गई।
‘कोल्ड्रिफ’ सिरप पर केंद्र की सख्त कार्रवाई
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सरेशान फार्मास्यूटिकल्स की खांसी की दवा कोल्ड्रिफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। तमिलनाडु फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को कंपनी के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रावधानों के तहत कदम उठाने के निर्देश दिए जाएंगे।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान में इस दवा के सेवन के बाद कई बच्चों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद केरल और तेलंगाना ने भी कोल्ड्रिफ के उपयोग पर चेतावनी जारी की है।
देशभर में संदिग्ध दवाओं की जांच शुरू
CDSCO ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कई दवा निर्माण इकाइयों की जांच शुरू कर दी है। अब तक 19 संदिग्ध दवाओं के नमूने लिए गए हैं, जिनमें खांसी की सिरप, एंटीबायोटिक्स और बुखार की दवाएं शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में बिक्री पर रोक
मध्य प्रदेश सरकार ने कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो डीएस सिरप की बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की कि जांच पूरी होने तक इन कंपनियों के अन्य उत्पादों की बिक्री भी बंद रहेगी।
केंद्र सरकार का नया दिशा-निर्देश
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप न दी जाए। वहीं, पांच साल से कम उम्र के बच्चों को केवल चिकित्सक की सलाह और सीमित मात्रा में ही दवा दी जाए। अब बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए संभावित रूप से हानिकारक दवाओं पर चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
क्या है खतरा?
तेलंगाना सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप के एक बैच में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) नामक जहरीला रसायन पाया गया है, जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और घातक साबित हो सकता है। इसी कारण राज्य सरकार ने लोगों को इस सिरप का उपयोग तुरंत बंद करने की सलाह दी है।
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