दिल्ली देहात में टोल हटाने की मांग तेज, कांग्रेस ने भी आंदोलन को दिया समर्थन

दिल्ली में यूईआर-2 (UER-2) पर लगे टोल के खिलाफ रविवार को टोल हटाओ संघर्ष समिति द्वारा प्रस्तावित पंचायत को प्रशासन की अनुमति नहीं मिली। पुलिस ने आयोजन स्थल पर टेंट लगाने की इजाज़त भी नहीं दी, जिसके चलते समिति के सदस्यों और समर्थकों को मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा के पास खड़े होकर ही पंचायत करनी पड़ी। पंचायत में तय हुआ कि अब 27 सितंबर को मुंडका में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।
समिति के वरिष्ठ सदस्य और खाप नेता रामकुमार सोलंकी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने खेत में पंचायत करने से भी रोक दिया, जिसके कारण लोगों को धूप में खड़े होकर ही बैठक करनी पड़ी। उन्होंने सवाल उठाया कि एक दिन पहले पंचायत की इजाजत दी गई थी, लेकिन अगले दिन रोक लगा दी गई। इसे उन्होंने भेदभावपूर्ण रवैया बताया।
पंचायत में मौजूद अन्य नेताओं ने टोल कंपनी पर आंदोलन को कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया। समिति के सदस्य विजय मान ने कहा कि यदि सभी संगठन एकजुट होकर दिल्ली देहात के मुद्दों पर लड़ेंगे तो बेहतर नतीजे मिलेंगे। इस मौके पर कई किसान नेता भी मौजूद रहे।
राजनीतिक समर्थन
इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। आम आदमी पार्टी के बाद कांग्रेस ने भी खुलकर साथ दिया है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि 20 सितंबर तक टोल हटाने की मांग नहीं मानी गई तो कांग्रेस ग्रामीणों और किसानों के अनिश्चितकालीन धरने में साथ खड़ी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार पंचायतों के बावजूद किसानों की बात अनसुनी कर रही है और दिल्ली देहात के हितों की अनदेखी कर रही है।
इस बीच, दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री, सभी मंत्रियों और विधायकों व सांसदों को पत्र लिखकर टोल प्लाजा हटाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि दिल्ली के पहले और दूसरे रिंग रोड पर कोई टोल नहीं है, तो तीसरे रिंग रोड पर भी टोल नहीं होना चाहिए।
आंदोलन की तैयारी
पालम खाप 360 के प्रधान चौधरी सुरेंद्र सोलंकी ने कहा कि यदि 20 सितंबर तक मांगे पूरी नहीं हुईं तो 21 सितंबर को दिल्ली देहात में बड़े स्तर पर चक्का जाम होगा। उनका कहना था कि यह सिर्फ टोल टैक्स का मामला नहीं बल्कि देहात के अधिकारों की लड़ाई है।
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