‘मैं घोर सनातन धर्म मानने वाला हूं’, भोजशाला चर्चा के बीच बोले दिग्विजय सिंह

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर इंदौर पहुंचे। इस दौरान वे रेसीडेंसी कोठी में भाजपा विधायक उषा ठाकुर से भी मिले। मुलाकात के दौरान भोजशाला मामले को लेकर दोनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की लेकिन चर्चा में रही नोकझोंक देखने को मिली। इसी बातचीत में दिग्विजय सिंह ने स्वयं को “घोर सनातन धर्म मानने वाला” बताया।
“मैं घोर सनातनी हूं” पर चर्चा
भोजशाला मामले में आए फैसले को लेकर बातचीत के दौरान उषा ठाकुर ने टिप्पणी की। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे सनातन परंपराओं का पालन करते हैं और नर्मदा परिक्रमा करने के साथ-साथ एकादशी का व्रत भी रखते हैं। जवाब में उषा ठाकुर ने उनसे कहा कि यदि वे स्वयं को पक्के सनातनी मानते हैं, तो इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करें और भोजशाला से जुड़े फैसले का सम्मान करें। इस पर दिग्विजय सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, “आपको कैसे लग गया कि मैंने फैसले का विरोध किया है?”
शोक व्यक्त करने इंदौर पहुंचे थे दिग्विजय सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री इंदौर में पूर्व विधायक अश्विन जोशी के निधन पर शोक व्यक्त करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और अन्य नेताओं से भी मुलाकात की।
केंद्र सरकार पर महंगाई को लेकर हमला
मीडिया से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2014 में “अच्छे दिनों” के वादे किए गए थे, लेकिन आज आम जनता महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रही है। उनके अनुसार पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे गरीब और अधिक प्रभावित हो रहा है।
“जनता को अब बचत की सलाह दी जा रही”
उन्होंने आगे कहा कि पहले भाजपा पर कांग्रेस के खिलाफ आरोप लगाने के उदाहरण दिए जाते थे, लेकिन अब स्थिति यह है कि लोगों को सोना न खरीदने, विदेश यात्रा सीमित करने और ईंधन का कम उपयोग करने जैसी सलाह दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है, रुपये में गिरावट आई है और बेरोजगारी बढ़ रही है।
नीट और भोजशाला मामले पर भी बयान
दिग्विजय सिंह ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। भोजशाला मामले पर उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा और आगे की कार्रवाई संविधान और कानून के दायरे में रहकर की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थल एएसआई संरक्षित है और अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में होगा।
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