विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरानी समकक्ष से फोन पर की बात, क्षेत्र के हालात पर चर्चा

HIGHLIGHTS
- विदेश मंत्री एस.
- जयशंकर ने बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की।
- दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात और मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
- जयशंकर ने दी जानकारी विदेश मंत्री एस.
- जयशंकर ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की।
- उन्होंने लिखा कि ईरान के विदेश मंत्री का फोन आया था और दोनों पक्षों ने मौजूदा स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया।
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात और मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
जयशंकर ने दी जानकारी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने लिखा कि ईरान के विदेश मंत्री का फोन आया था और दोनों पक्षों ने मौजूदा स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। साथ ही, दोनों नेताओं ने भविष्य में भी लगातार संपर्क में रहने पर सहमति जताई।
मॉस्को यात्रा के बाद हुई बातचीत
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में रूस की यात्रा पर थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, युद्धविराम की संभावनाओं और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर चर्चा हुई थी।
तेहरान स्थित ईरानी दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय हालात, क्षेत्रीय तनाव और चल रहे संघर्ष से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए।
होर्मुज जलडमरूमध्य और प्रतिबंधों पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार बातचीत में अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े समुद्री मार्गों पर पाबंदियों से उत्पन्न स्थिति पर भी चर्चा हुई। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
ईरानी विदेश मंत्री हाल ही में कूटनीतिक प्रयासों के तहत ओमान और पाकिस्तान का दौरा करने के बाद मॉस्को पहुंचे थे, जहां उन्होंने क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर दिया।
अमेरिका-ईरान वार्ता में अब तक प्रगति नहीं
इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही थी। हालांकि बाद में अमेरिका की ओर से संघर्ष विराम को अस्थायी रूप से आगे बढ़ाया गया, ताकि कूटनीतिक समाधान के लिए समय मिल सके।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, यह तनाव 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले के बाद बढ़ा, जिसमें ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से स्थिति पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनावपूर्ण हो गई और संघर्ष ने व्यापक रूप ले लिया।
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