'लव और लैंड जेहाद करने वालों को मारना पाप नहीं': जगद्गुरु रामभद्राचार्य

अलीगढ़ के लधौआ गांव में चल रही श्रीराम कथा के दौरान सोमवार को व्यासपीठ से जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कई सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि चरित्रवान व्यक्ति ही परिवार, समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होता है और ऐसे व्यक्ति का जीवन हमेशा उपयोगी सिद्ध होता है।
अपने प्रवचन में उन्होंने श्रीराम कथा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे सुनने से मनुष्य के अनेक पापों का नाश होता है। कथा स्थल पर सुबह विधिवत हवन भी किया गया, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद रही। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने पूरे परिसर में कड़े इंतजाम किए और प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं की इलेक्ट्रॉनिक जांच की गई।
संस्कार और सामाजिक मूल्यों पर जोर
रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में माता-पिता और शिक्षकों से अपील की कि वे नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जोड़ें। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा हमेशा से मर्यादा, त्याग, सेवा और परिवार व्यवस्था की समर्थक रही है, और इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज का संतुलित विकास संभव है।
उन्होंने युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि चरित्र ही मनुष्य का सबसे बड़ा धन है, क्योंकि धन और पद समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन अच्छा चरित्र जीवन भर व्यक्ति के साथ रहता है।
युवतियों को दी सलाह
जगद्गुरु ने विशेष रूप से युवतियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने संस्कार, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति सजग रहना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लिए जाएं और किसी भी प्रकार के भ्रम, प्रलोभन या दबाव से बचा जाए।
उन्होंने आगे कहा कि समाज को ऐसे मामलों से सतर्क रहने की जरूरत है, जो पारिवारिक और सामाजिक संरचना को प्रभावित कर सकते हैं। इस दौरान कथा स्थल पर “जय श्रीराम” और “सीता-राम” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
सुरक्षा व्यवस्था सख्त
सोमवती अमावस्या के अवसर पर कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए थे। प्रवेश द्वार पर सघन जांच की व्यवस्था की गई और पूरे आयोजन स्थल पर निगरानी बढ़ा दी गई।
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