झालावाड़: फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र से नौकरी पाने वाला शिक्षक गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- झालावाड़ में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शिक्षक को गिरफ्तार किया है।
- आरोपी पिछले करीब 12 वर्षों से राजकीय सेवा में कार्यरत था।
- इस संयुक्त कार्रवाई को झालावाड़ पुलिस और एसओजी जयपुर की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
- गिरफ्तार शिक्षक को अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि इसी मामले में एक अन्य शिक्षक की तलाश जारी है।
- गोपनीय शिकायतों से शुरू हुई जांच एसपी अमित कुमार बुडानिया के अनुसार, पु…
झालावाड़ में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शिक्षक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले करीब 12 वर्षों से राजकीय सेवा में कार्यरत था। इस संयुक्त कार्रवाई को झालावाड़ पुलिस और एसओजी जयपुर की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। गिरफ्तार शिक्षक को अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि इसी मामले में एक अन्य शिक्षक की तलाश जारी है।
गोपनीय शिकायतों से शुरू हुई जांच
एसपी अमित कुमार बुडानिया के अनुसार, पुलिस को विभिन्न विभागों में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को लेकर गोपनीय शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों के आधार पर आरपीएस प्रोबेशनर कृष्ण गोपाल के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। बाद में एसओजी जयपुर से भी इसी तरह की सूचनाएं मिलने के बाद संयुक्त जांच टीम गठित की गई।
मेडिकल जांच में हुआ खुलासा
जांच के दौरान संबंधित कर्मचारियों का बायोमीट्रिक सत्यापन कराया गया और मेडिकल कॉलेज कोटा में विशेष मेडिकल बोर्ड से पुनः जांच करवाई गई। रिपोर्ट में सामने आया कि दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता जरूरी होती है, जबकि आरोपी बनेसिंह की दिव्यांगता केवल 6 प्रतिशत और दूसरे आरोपी योगेश कुमार की दिव्यांगता शून्य पाई गई। इसके आधार पर दोनों को आरक्षण लाभ के लिए अयोग्य माना गया।
दस्तावेजों की गहन जांच
मामले में कोतवाली थाने में केस दर्ज कर जांच आरपीएस प्रशिक्षु कमल कुमार मीणा को सौंपी गई। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आवेदन पत्र, परीक्षा परिणाम, नियुक्ति आदेश, मेडिकल प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच की गई।
एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार
पुलिस ने 3 जून को बनेसिंह (35), निवासी राकड़ा, तहसील अकलेरा को गिरफ्तार किया। वह वर्तमान में बकानी स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में वरिष्ठ अध्यापक (गणित) के पद पर कार्यरत था और 2013 की भर्ती के माध्यम से नियुक्त हुआ था।
वहीं दूसरे आरोपी योगेश कुमार, निवासी बयाना (भरतपुर), वर्तमान में भवानीमंडी ब्लॉक के बजरपुरा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में कार्यरत है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करने और जारी करने में किन अन्य लोगों की भूमिका रही है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.