भोपाल में मोबाइल गेम की लत ने छीनी 14 वर्षीय छात्र की जान

भोपाल। पिपलानी इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते एक नाबालिग छात्र ने अपनी जान दे दी। छत्रसाल नगर की श्रीराम कॉलोनी में रहने वाले 14 वर्षीय अंश साहू ने सोमवार दोपहर अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कक्षा आठ में पढ़ने वाला अंश लंबे समय से खतरनाक ऑनलाइन गेम्स, खासकर ‘ब्लू व्हेल’ जैसे गेम से जुड़ा हुआ था। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि अंश मोबाइल पर इन गेम्स को काफी समय से खेल रहा था। आशंका जताई जा रही है कि किसी ऑनलाइन चुनौती या टास्क के दबाव में उसने यह कदम उठाया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
घर में था अकेला
बताया गया कि अंश अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। दोनों माता-पिता एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं। घटना के समय वे पास में रहने वाले एक रिश्तेदार के तेरहवीं कार्यक्रम में गए हुए थे। जब परिवार वापस लौटा तो अंश को फंदे से लटका पाया गया। उसे तुरंत इंद्रपुरी स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन छात्र का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। फोन लॉक होने के कारण उसकी डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किन ऐप्स और गेम्स से जुड़ा था।
कैसे काम करता है ब्लू व्हेल जैसा गेम
साइबर विशेषज्ञ आर.के. बल के अनुसार, ब्लू व्हेल कोई सामान्य गेम नहीं बल्कि एक मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला डिजिटल जाल है। इसमें खिलाड़ी को 50 दिनों तक अलग-अलग टास्क दिए जाते हैं, जिन्हें एक अनजान संचालक नियंत्रित करता है। शुरुआती कार्य मामूली होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे वे व्यक्ति को मानसिक रूप से तोड़ने लगते हैं और अंत में खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया जाता है। बीच में खेल छोड़ने पर खिलाड़ियों को डराने और धमकाने की भी शिकायतें सामने आती रही हैं।
भारत में पहले ही प्रतिबंधित
इस तरह के गेम भारत में 2017-18 में प्रतिबंधित किए जा चुके हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये अब अलग-अलग नामों से ऑनलाइन मौजूद हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अगर बच्चा अचानक अकेला रहने लगे, देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करे, या उसके व्यवहार में गुस्सा और चिड़चिड़ापन दिखे, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।
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