एटीएफ कीमतों पर नई व्यवस्था लागू, एयरलाइंस को 3 साल का फिक्स रेट ऑफर

नई दिल्ली। सरकार ने विमानन क्षेत्र को राहत देने और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए नई प्राइस स्टेबलाइजेशन व्यवस्था लागू की है। इसके तहत घरेलू एयरलाइंस अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों को तीन साल तक एक निश्चित दर पर लॉक कर सकेंगी। इसी बीच सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी कर दी है।
नई व्यवस्था के अनुसार, जो एयरलाइंस इस स्वैच्छिक योजना को अपनाएंगी, उन्हें एटीएफ के लिए 115 रुपये प्रति लीटर की फिक्स दर पर भुगतान करना होगा। इससे पहले यह दर लगभग 104.93 रुपये प्रति लीटर थी।
हालांकि जो एयरलाइंस इस योजना से बाहर रहने का विकल्प चुनेंगी, उन्हें बाजार आधारित दरों पर ही ईंधन खरीदना होगा, जो फिलहाल करीब 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच रही हैं। यह दर अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक यह योजना पूरी तरह वैकल्पिक है और एयरलाइंस अपनी व्यावसायिक रणनीति के अनुसार इसमें शामिल होने या न होने का फैसला कर सकती हैं। इसमें शामिल होने वाली कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी, जबकि बाहर रहने वाली कंपनियों को कीमत घटने पर फायदा और बढ़ने पर नुकसान दोनों का जोखिम उठाना होगा।
फिक्स्ड प्राइसिंग मॉडल 86.32 रुपये प्रति लीटर के बेस ‘फ्री-ऑन-बोर्ड’ (FOB) रेट पर आधारित है, जिसमें टैक्स, एयरपोर्ट शुल्क और तेल कंपनियों का मार्जिन शामिल किया गया है। इसके अनुसार दिल्ली में प्रभावी ATF कीमत 115 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 114.5 रुपये और चेन्नई में करीब 139 रुपये प्रति लीटर तय की गई है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन महंगा हुआ, हालांकि घरेलू बाजार में कीमतें लंबे समय तक स्थिर बनी रहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बढ़ने का पूरा असर ग्राहकों पर न डालने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को कुछ समय तक नुकसान भी उठाना पड़ा था।
इसी स्थिति को संतुलित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के प्राइस स्टेबलाइजेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है। इस व्यवस्था के तहत जब वैश्विक कीमतें निर्धारित बेस रेट से ऊपर जाती हैं तो सरकार तेल कंपनियों को अंतर की भरपाई के लिए ब्याज-मुक्त एडवांस देती है। वहीं कीमतें घटने पर अतिरिक्त राशि वापस लेकर भारत के समेकित कोष में जमा कर दी जाती है।
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