ओंकारेश्वर: ममलेश्वर झूला पुल बंद, सुरक्षा कारणों से आवाजाही रोकी गई

ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)। तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को जोड़ने वाला ऐतिहासिक ममलेश्वर झूला पुल सुरक्षा कारणों के चलते अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। मंगलवार देर रात पुल की लोडिंग तार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण हुक (लिंक) टूट जाने के बाद प्रशासन ने एहतियातन यह कदम उठाया।
बुधवार सुबह करीब 5 बजे से पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई और आम श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई। सुरक्षा गार्डों की तैनाती भी की गई है ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर पुल पर न जा सके।
तकनीकी खराबी के बाद अलर्ट पर प्रशासन
जानकारी के अनुसार, देर रात मंदिर प्रशासन को पुल में तकनीकी खराबी की सूचना मिली थी। इसके बाद जांच में पाया गया कि सस्पेंशन सिस्टम का एक हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिससे पुल पर असंतुलन की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हुक टूटने के बाद बाकी केबलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और पुल का एक हिस्सा हल्का झुका हुआ भी दिखाई दे रहा है, जिससे चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों की टीम पहुंची, मरम्मत शुरू
खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने बताया कि केवल एक हुक प्रभावित हुआ है, जबकि पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित है। इंदौर से विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है।
नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने कहा कि सुरक्षा परीक्षण और मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद ही पुल को दोबारा खोला जाएगा। इसमें दो से तीन दिन का समय लग सकता है।
पहले भी हो चुकी है तकनीकी समस्या
यह पहली घटना नहीं है। वर्ष 2023 में भी पुल का सस्पेंशन हुक अत्यधिक भीड़ और भार के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। उस समय महाशिवरात्रि और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण पुल पर दबाव बढ़ गया था।
तेज आवाज के साथ हुक टूटने की घटना के बाद तत्काल पुल को बंद कर दिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
7.20 करोड़ रुपये की लागत से बना है पुल
यह झूला पुल ओंकारेश्वर बांध परियोजना से जुड़े उपक्रम द्वारा लगभग 7.20 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। समय-समय पर इसकी मरम्मत और रखरखाव किया जाता रहा है।
कुछ वर्षों पहले लगाए गए टीन शेड अतिरिक्त भार और हवा के दबाव के कारण हटाने पड़े थे।
श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी, वैकल्पिक मार्ग उपयोग में
पुल बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को अब वैकल्पिक मार्गों और नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है।
नाविक संघ के अनुसार, श्रद्धालुओं को 50 रुपये प्रति व्यक्ति नदी पार कराई जा रही है, जबकि 100 रुपये में पूरे नर्मदा परिक्रमा कराई जा रही है।
जेपी चौक पुल पर बढ़ा दबाव
ममलेश्वर झूला पुल बंद होने के बाद अब पूरा यातायात जेपी चौक पुल से डायवर्ट हो गया है, जिससे उस पर भी दबाव बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने उसके रखरखाव और सुरक्षा जांच की मांग भी उठाई है।
स्थानीय सुझाव और चिंता
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्थायी सीमेंट-कांक्रीट पुल अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं। वर्ष 1979 में बना एक पुराना पुल आज भी मजबूत स्थिति में है, जिससे स्थायी संरचनाओं की उपयोगिता पर सवाल उठते हैं।
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