साकेत बिल्डिंग हादसा: दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार, भड़काऊ वीडियो हटाने के आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक अहम सुनवाई के दौरान उन सभी सोशल मीडिया वीडियो और पोस्ट को तत्काल हटाने के निर्देश दिए, जिनमें साकेत में इमारत गिरने की घटना को लेकर एक वरिष्ठ हाईकोर्ट जज पर गंभीर आरोप लगाए गए थे और उन्हें “मर्डरर” तक कहा गया था।
कोर्ट की अवकाश पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति मधु जैन शामिल थीं, ने कहा कि इस तरह की सामग्री न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाती है और आम जनता के न्याय व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करती है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने पर भी विचार किया जा सकता है।
सुनवाई में कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान पीठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आपत्तिजनक और गलत जानकारी सामने आती है तो प्लेटफॉर्म्स को खुद भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने टिप्पणी की कि सोशल मीडिया इतना प्रभावशाली हो गया है, ऐसे में क्या इन प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही तय नहीं की जानी चाहिए? अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे कंटेंट को स्वतः हटाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित वीडियो में किए गए दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और ये न्यायपालिका को बदनाम करने तथा विवाद खड़ा करने का प्रयास प्रतीत होते हैं। अदालत ने उम्मीद जताई कि लोग ऐसे भ्रामक दावों पर ध्यान न दें।
क्या है पूरा मामला
30 मई को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक इमारत ढहने की घटना में छह लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कपिल कक्कड़ ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर) और लिंक्डइन पर कई वीडियो पोस्ट किए।
इन वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि एक हाईकोर्ट जज ने अवैध निर्माण रोकने से जुड़ी याचिका खारिज की थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
बार एसोसिएशन की याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने इन वीडियो को लेकर आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल की है। बार एसोसिएशन का कहना है कि लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं।
उनका यह भी दावा है कि संबंधित न्यायिक आदेश केवल याचिका को तकनीकी आधार पर वापस लेने की अनुमति से जुड़ा था, क्योंकि मामले में संपत्ति मालिक को पक्षकार नहीं बनाया गया था।
जांच और आगे की कार्रवाई
फिलहाल अदालत ने सभी आपत्तिजनक सामग्री हटाने का आदेश देते हुए मामले में सख्त रुख अपनाया है और आगे की सुनवाई में अतिरिक्त निर्देश दिए जाने की संभावना जताई है।
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