ईरान के परमाणु ठिकानों पर फिर से हलचल, सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव के बीच एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका और इजराइल के हालिया हमलों के बावजूद, ईरान ने अपने भूमिगत परमाणु ठिकानों पर गतिविधियां बढ़ा दी हैं। वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की नवीनतम सैटेलाइट रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है।
रिपोर्ट के अनुसार, नतांज के दक्षिण में पिकऐक्स माउंटेन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूमिगत निर्माण कार्य चल रहा है। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2020 से जारी है। तस्वीरों में सुरंगों का एक जाल और मजबूत सुरक्षा दीवारें दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह क्षेत्र या तो नया सेंट्रीफ्यूज असेंबली प्लांट हो सकता है या फिर गुप्त यूरेनियम संवर्धन केंद्र।
गुप्त भंडार और नई चिंताएं
CSIS की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के पास लगभग 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम (HEU) है, जिसे हमलों से पहले एक अज्ञात स्थान पर पहुंचा दिया गया था। यह मात्रा करीब 10 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी रूप से ईरान बम बनाने में सक्षम है, लेकिन उसे अब भी कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बयान दिया है कि यदि अमेरिका समानता और ईमानदारी से बातचीत करे, तो ईरान नए समझौते के लिए तैयार है।
हालिया हमलों के बाद बढ़ा तनाव
जून में अमेरिका और इजराइल ने नतांज, इस्फहान और फोर्डो स्थित ईरानी परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में कई महत्वपूर्ण ढांचे नष्ट हो गए थे, जिससे यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रुक गई थी। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब पहुंच चुका था।
भविष्य को लेकर चेतावनी
CSIS ने अपनी रिपोर्ट में चेताया है कि ईरान अब गुप्त रूप से अपने परमाणु कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने में जुटा है। संस्था ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वह ईरान पर NPT (Non-Proliferation Treaty) और IAEA के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाए, ताकि भविष्य में विश्वसनीय परमाणु वार्ता संभव हो सके।
हालांकि, ईरान लगातार यह दावा करता आ रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा उत्पादन और शांति के उद्देश्य से है, न कि हथियार निर्माण के लिए।
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