बिहार चुनाव से पहले झटका: औरंगाबाद जिला कमेटी ने जदयू के सभी पदों से दिया सामूहिक इस्तीफा

बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) को चुनाव से पहले औरंगाबाद जिले में बड़ा झटका लगा है। रविवार को जिले की पूरी जिला कमेटी ने अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इस कदम ने जिले में पार्टी संगठन में भूचाल ला दिया। संगठन ने तुरंत पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह को कार्यकारी जिलाध्यक्ष नियुक्त कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
प्रत्याशी चयन को बताया इस्तीफे की वजह
पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि रफीगंज विधानसभा सीट से पार्टी ने जिस व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया है, वह जदयू का प्राथमिक सदस्य तक नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर पार्टी ने किसी पुराने जदयू नेता या एनडीए के घटक दल के नेता को टिकट दिया होता, तो कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन इस फैसले से कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुईं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा पद से है, पार्टी से नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि रफीगंज को छोड़कर जिले की अन्य पांच सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए वे काम करते रहेंगे।
नीतीश कुमार के प्रति निष्ठा बनी हुई
अशोक सिंह ने याद दिलाया कि 2009 में उन्होंने अपने पिता, पूर्व विधायक रामाधार सिंह की मौजूदगी में जदयू ज्वाइन किया था और जीवनभर नीतीश कुमार के साथ रहने का वचन दिया था। “मैं आज भी उस वचन पर कायम हूं और शमशान घाट तक उनका साथ दूंगा,” उन्होंने कहा। उन्होंने 2010 और 2015 में पार्टी के जरिए विधायक बनने और संगठन में अपने योगदान का भी जिक्र किया।
उम्मीदवार चयन पर उठाए सवाल
अशोक सिंह ने बिना नाम लिए रफीगंज से उम्मीदवार पर निशाना साधा और कहा कि जिस व्यक्ति ने पहले पार्टी का झंडा फूंका और नीतीश कुमार का अपमान किया, वही अब उम्मीदवार बना दिया गया है। इससे कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुईं।
संगठन मजबूत करने के प्रयास जारी रहेंगे
पूर्व जिलाध्यक्ष ने बताया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने पार्टी संगठन को घर-घर तक पहुँचाया, गुटबाजी को समाप्त किया और हर बूथ पर सक्रियता सुनिश्चित की। पद से इस्तीफा देने के बाद भी वे पार्टी के लिए काम करते रहेंगे और रफीगंज को छोड़कर अन्य सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों को जीत दिलाने का प्रयास करेंगे।
उम्मीदवार की कथित शिष्टाचारहीनता
अशोक सिंह ने आरोप लगाया कि रफीगंज से उम्मीदवार बनने के बाद उन्होंने संगठन या पदाधिकारियों से संपर्क किए बिना सीधे नामांकन कर दिया और सामान्य शिष्टाचार भी नहीं निभाया।
उम्मीदवार का जवाब
जदयू उम्मीदवार प्रमोद सिंह ने कहा, “अशोक सिंह मेरे बड़े भाई की तरह हैं। राजनीति में ऐसे मतभेद होते रहते हैं और समय के साथ इन्हें सुलझा लिया जाएगा।”
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