ट्विशा के माता-पिता को झटका: दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग खारिज

भोपाल में नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अनुदिता गुप्ता की अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम कराए जाने की याचिका को खारिज कर दिया है। ट्विशा की शादी के महज पांच महीने बाद कटारा हिल्स स्थित ससुराल में उनका शव मिलने के बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मृतका का पोस्टमार्टम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल जैसे उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थान में पहले ही किया जा चुका है। रिकॉर्ड में अब तक पुलिस या संबंधित पक्ष की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है। अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 के प्रावधानों के तहत स्थानीय अदालत के अधिकार क्षेत्र की सीमाएं हैं, और वह बाहर स्थित संस्थान में दोबारा पोस्टमार्टम का आदेश नहीं दे सकती।
इधर, अदालत के फैसले से पहले मृतका के परिजन मंत्रालय पहुंचे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। परिजनों ने मामले की सीबीआई जांच, पति समर्थ सिंह की तत्काल गिरफ्तारी, सास गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज करने, दोबारा पोस्टमार्टम और पार्थिव शरीर के स्थानांतरण में सहायता की मांग की। मुख्यमंत्री ने इनमें से कई मांगों पर सहमति जताते हुए कहा कि जमानत का मामला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
गौरतलब है कि 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा को 12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित ससुराल में फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया था। परिजनों ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के सिर, कान और हाथ पर चोटों के निशान पाए गए थे, जिन्हें डॉक्टरों ने मृत्यु से पहले की चोटें बताया था और किसी कठोर वस्तु से लगी चोट की संभावना जताई थी। वहीं, मामले में फरार चल रहे पति समर्थ सिंह की जमानत याचिका पहले ही जिला अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी है, और पुलिस ने उस पर इनाम की राशि बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी है।
अदालत ने थाना प्रभारी को यह भी निर्देश दिया है कि शव को सुरक्षित रखने के लिए राज्य के भीतर किसी बड़े चिकित्सा संस्थान में माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर संरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में जांच के दौरान साक्ष्यों की शुद्धता प्रभावित न हो।
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