त्विषा शर्मा केस: ऐसी घटना से अच्छा, हो जाए तलाक; सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने त्विषा शर्मा मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को इसकी सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इसे एक गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने मामले को सनसनीखेज बनाने से बचने की अपील भी की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि त्विषा शर्मा की मौत को प्रारंभिक रूप से अप्राकृतिक मृत्यु माना गया है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में कुछ महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जिनमें दूसरा पोस्टमार्टम पूरा होना भी शामिल है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वह पीड़ित या संबंधित परिवारों के बयान प्रसारित करने से परहेज करे और जांच प्रक्रिया को उसके स्वाभाविक तरीके से आगे बढ़ने दे।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ मामलों में न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच एजेंसियां, चाहे वह सीबीआई हो या अन्य अधिकारी, सच्चाई तक पहुंचने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करेंगे और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाएंगे।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश और मृतका की सास गिरिबाला सिंह के मीडिया में दिए गए बयानों से जांच प्रभावित हो रही है और इससे गलत धारणा बन रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए संभावित गवाहों और आरोपियों के मीडिया में बयान देने पर रोक लगा दी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सुनिश्चित करेगी कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े। साथ ही मीडिया से अपील की गई कि वह इस संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार के दर्द को सनसनीखेज न बनाए।
सुप्रीम कोर्ट ने त्विषा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले की सराहना भी की। वहीं, आरोपी पक्ष के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि जांच से जुड़े मामले में पूर्व न्यायाधीश और गिरिबाला सिंह अब मीडिया से कोई बयान नहीं देंगी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.