वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को व्यवस्थित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान कर रहा है जिनके पास एक साथ एलपीजी और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) दोनों कनेक्शन हैं। सरकार का उद्देश्य दोहरे कनेक्शन पर रोक लगाना, सब्सिडी के दुरुपयोग को नियंत्रित करना और बिना पाइपलाइन गैस सुविधा वाले परिवारों को एलपीजी की प्राथमिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
नया नियम लागू, दोहरे कनेक्शन पर रोक
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत 14 मार्च को जारी संशोधित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन उपभोक्ताओं के पास पीएनजी कनेक्शन है, उन्हें अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य होगा। नए नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति दोनों सुविधाएं एक साथ नहीं रख सकता। ऐसे उपभोक्ता न तो एलपीजी सिलेंडर का रिफिल ले सकेंगे और न ही नया कनेक्शन प्राप्त कर सकेंगे। तेल कंपनियों को भी ऐसे मामलों में आपूर्ति करने से रोक दिया गया है।
सरकार का फोकस पीएनजी विस्तार पर
सरकार इस नीति के जरिए पीएनजी नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि एलपीजी पर निर्भरता कम की जा सके। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार अब तक 43,000 से अधिक उपभोक्ता स्वेच्छा से अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर चुके हैं, हालांकि यह संख्या अभी अपेक्षाकृत कम है और आगे इसमें वृद्धि की उम्मीद है।
वैश्विक संकट का असर
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। देश लगभग 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी विदेशों से आयात करता है। हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ा है।
आपूर्ति पर दबाव, नए कनेक्शन पर रोक
आयात में अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने औद्योगिक इकाइयों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों जैसे होटल-रेस्तरां को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता के आधार पर समायोजन किया है। कई क्षेत्रों में एलपीजी आपूर्ति सीमित की गई है और नए घरेलू कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया भी फिलहाल रोक दी गई है।