पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, एक दिन पहले आई तेज बढ़त के बाद निवेशकों में कुछ सतर्कता भी देखी गई, खासकर तब जब अमेरिका की ओर से घरेलू ऊर्जा कीमतों को स्थिर रखने के संकेत मिले।
तेल की कीमतों में कितनी तेजी?
ब्रेंट क्रूड वायदा मंगलवार को लगभग 1.70 डॉलर चढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जो करीब 2.2 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इससे पहले सोमवार को यह 82 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया था, जो कई महीनों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। दिन के अंत में कुछ मुनाफावसूली हुई, लेकिन कुल मिलाकर मजबूत बढ़त बनी रही।
उधर, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1 डॉलर से अधिक उछलकर 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में इसमें भी उल्लेखनीय तेजी देखी गई थी।
तनाव का बड़ा कारण: होर्मुज जलडमरूमध्य
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में जल्द राहत के संकेत नहीं हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है, जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम तरल आपूर्ति और बड़ी मात्रा में एलएनजी गुजरती है। इस मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा सकता है।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यदि क्षेत्र में संघर्ष और गहराता है तथा तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कीमतें 100 डॉलर के पार भी जा सकती हैं। कुछ आकलनों में तो ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
भारत पर क्या असर?
तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर भारत के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तीन अंकों के स्तर पर स्थिर हो जाती हैं, तो देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे महंगाई पर दबाव और राजकोषीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत मिले हैं कि ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। इस बयान से बाजार में कुछ हद तक घबराहट कम हुई, लेकिन निवेशकों की नजर अब भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी है।
वैश्विक शेयर बाजारों की चाल
तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखी गई, जबकि सिंगापुर बाजार में हल्की मजबूती दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजारों में भी मिश्रित रुख रहा। डाउ जोन्स में हल्की गिरावट आई, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।