राजस्थान में सामने आए बहुचर्चित लोक परीक्षा घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरएएस चयनित अभ्यर्थी हनुमाना राम की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध सबूतों को देखते हुए आरोपी को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों को माना गंभीर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपी पर लगे आरोप केवल सामान्य अनियमितता नहीं हैं, बल्कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सीधा असर डालते हैं।
अदालत ने यह भी माना कि जांच में सामने आए तथ्य किसी संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने की ओर संकेत करते हैं।
कई परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बनने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, हनुमाना राम पर आरोप है कि वह राजस्थान पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती और पटवार भर्ती परीक्षा सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर डमी उम्मीदवार के रूप में शामिल हुए।
इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया है और फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
राज्य सरकार ने किया कड़ा विरोध
राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि इस तरह की गतिविधियां पूरी परीक्षा प्रणाली की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। सरकार ने कहा कि यदि चयन प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति ही इस तरह की अनियमितताओं में शामिल पाए जाएं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
जमानत याचिका खारिज
सभी पक्षों की दलीलों और जांच में सामने आए तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामला केवल एक घटना नहीं, बल्कि कथित तौर पर लगातार किए गए कृत्यों से जुड़ा प्रतीत होता है।
इस फैसले को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सख्ती बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।