नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते को केंद्र सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर करार दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह डील ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में अहम साबित होगी। सरकार का दावा है कि इससे छोटे, मध्यम और सूक्ष्म उद्योग (MSME) वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़े रहेंगे, लागत में कमी आएगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

अमित शाह का बयान:
गृह मंत्री अमित शाह ने इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विज़न को साकार करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह डील ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देगी और किसानों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स, मछुआरों और युवाओं के लिए नए रोजगार पैदा करेगी। शाह ने कहा, “यह समझौता देश के विकास इंजन को नई गति देगा और महिलाओं के लिए भी रोजगार के मौके बढ़ाएगा।”

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का विवरण:
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह डील MSME और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत लाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर देगा। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों के आयात पर शुल्क घटाएगा या समाप्त करेगा। इन उत्पादों में ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट शामिल हैं।

डील की खास बातें:
भारत ने अमेरिका से अगले पांच वर्षों में $500 बिलियन के उत्पाद खरीदने की योजना बनाई है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी उपकरण और कोकिंग कोल शामिल हैं। वित्त मंत्रालय ने बताया कि कृषि और डेयरी क्षेत्र की संवेदनशीलता पूरी तरह ध्यान में रखी गई है। इस मामले पर निर्मला सीतारमण ने ट्वीट कर कहा कि प्रमुख कृषि और डेयरी उत्पाद सुरक्षित रहेंगे, जिससे किसानों की आय मजबूत होगी।

डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में भारत की बढ़त:
सरकार ने यह भी बताया कि समझौते के तहत डिजिटल सेवाओं में भारत की बढ़त और मजबूत होगी। संयुक्त तकनीकी सहयोग भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा और डिजिटल सेवाओं का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का कहना है कि यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के बड़े अवसर भी प्रदान करेगी।

इस समझौते से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे और घरेलू अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।