अमेरिकी सीनेट में बुधवार को हुए अहम मतदान में रिपब्लिकन सांसदों ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसका मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को सीमित करना था। यह प्रस्ताव 53 के मुकाबले 47 वोटों से पारित नहीं हो सका।

दरअसल, यह प्रस्ताव ‘वार पावर्स रेजोल्यूशन’ के तहत लाया गया था। इसमें मांग की गई थी कि भविष्य में ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य हो। मतदान काफी हद तक पार्टी लाइन के आधार पर हुआ, हालांकि कुछ सांसदों ने अलग रुख अपनाया। रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इसके खिलाफ मतदान किया।

डेमोक्रेट्स बोले- अमेरिका को नए युद्ध में झोंका जा रहा

मतदान से पहले सीनेट में माहौल गंभीर बना रहा और इस मुद्दे पर लंबी बहस हुई। कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने चिंता जताई कि अमेरिका को एक और बड़े संघर्ष की ओर धकेला जा रहा है।

सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि यह मतदान इस बात का संकेत होगा कि सांसद अमेरिकी जनता की भावनाओं के साथ खड़े हैं या ट्रंप प्रशासन के फैसले के साथ। उनके अनुसार मध्य पूर्व में लंबे समय तक चले युद्धों से अमेरिकी लोग पहले ही थक चुके हैं और अब नए संघर्ष की आवश्यकता नहीं है।

रिपब्लिकन का तर्क- ईरान के खतरे का जवाब जरूरी

वहीं रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में ईरान के खतरे का सामना करना जरूरी है।

रिपब्लिकन नेता जॉन बरासो ने कहा कि डेमोक्रेट्स राजनीतिक विरोध में ज्यादा उलझे हैं, जबकि असली मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है। उनके अनुसार अमेरिका को ईरान से उत्पन्न खतरे को गंभीरता से लेते हुए सरकार के कदमों का समर्थन करना चाहिए।

कांग्रेस का समर्थन जुटाने में जुटा ट्रंप प्रशासन

ईरान पर हाल में शुरू किए गए हमलों के बाद ट्रंप प्रशासन कांग्रेस का समर्थन हासिल करने की कोशिश में लगा हुआ है। इस सप्ताह प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी सांसदों से मुलाकात कर स्थिति के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि मौजूदा सैन्य अभियान करीब आठ सप्ताह तक जारी रह सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिकी वायुसेना की बढ़त के बावजूद ईरान के पास अभी भी मिसाइल हमले करने की क्षमता बनी हुई है।

सांसदों के लिए राजनीतिक रूप से अहम मुद्दा

सीनेट में हुआ यह मतदान कई सांसदों के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर आगामी मध्यावधि चुनावों के संदर्भ में। प्रस्ताव पेश करने वाले डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन ने कहा कि इस मुद्दे पर हर सांसद को स्पष्ट करना होगा कि वह युद्ध के समर्थन में है या इसके खिलाफ।

अब प्रतिनिधि सभा में होगी अगली बहस

सीनेट के बाद अब यह मामला अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी उठने वाला है, जहां इस विषय पर बहस और मतदान की संभावना है।

कुछ सांसदों का कहना है कि ईरान आतंकवाद को समर्थन देने वाला प्रमुख देश है और उसके खिलाफ कड़ा कदम उठाना जरूरी है। वहीं कई डेमोक्रेटिक नेताओं का मानना है कि युद्ध का सबसे बड़ा बोझ अमेरिकी सैनिकों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है, इसलिए ऐसे फैसलों पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए।