भारत ने साल 2020 के बाद दुनिया भर में आई आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच खुद को एक मजबूत और लचीली उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिसने संकट के समय मुद्रा में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की मौद्रिक नीति व्यवस्था स्पष्ट और अनुमानित है, जो किसी भी आर्थिक झटके के समय स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है। साथ ही, महंगाई पर नियंत्रण और जरूरत के अनुसार विनिमय दरों में लचीलापन देश की आर्थिक मजबूती को और बढ़ाता है। मूडीज ने कहा कि मजबूत घरेलू बाजार और विशाल विदेशी मुद्रा भंडार भारत को भविष्य के किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में रखते हैं।
चार बड़े वैश्विक संकटों का असर
मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में पिछले कुछ वर्षों में आए चार प्रमुख वैश्विक आर्थिक झटकों का भी उल्लेख किया है—
- 2020 की कोविड-19 महामारी
- 2022 में महंगाई और ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी
- 2023 में अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर का संकट
- 2025 में टैरिफ से जुड़ा वैश्विक तनाव
इन सभी घटनाओं ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव डाला, लेकिन भारत समेत कई देशों ने बिना बड़े नुकसान के इन चुनौतियों का सामना किया। भारत ने इस दौरान न केवल बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखी, बल्कि जोखिम प्रीमियम में भी बड़ी बढ़ोतरी से बचाव किया।
मजबूत होने के बावजूद एक चिंता
रिपोर्ट में सकारात्मक संकेतों के साथ एक अहम चिंता भी जताई गई है। मूडीज के अनुसार, भारत पर अपेक्षाकृत अधिक सार्वजनिक कर्ज और कमजोर राजकोषीय संतुलन का दबाव बना हुआ है, जिससे किसी भी आर्थिक संकट के समय सरकार की प्रतिक्रिया क्षमता सीमित हो सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर मूडीज की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने पिछले वर्षों में नीतिगत सुधारों, मजबूत वित्तीय ढांचे और बड़े विदेशी भंडार के दम पर वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच अपनी स्थिति मजबूत की है। हालांकि, कर्ज और राजकोषीय घाटे जैसी चुनौतियां अभी भी नीति-निर्माताओं के लिए ध्यान देने योग्य क्षेत्र बनी हुई हैं।