कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य में संभावित कैबिनेट फेरबदल, नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों और हालिया राजनीतिक चर्चाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि मंत्रिमंडल में किसी भी तरह के बदलाव का निर्णय पूरी तरह पार्टी हाईकमान के हाथ में है। सिद्धारमैया के अनुसार, उन्हें जब भी दिल्ली बुलाया जाएगा, वे वहां जाकर नेतृत्व से चर्चा करेंगे।

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की उनके समर्थकों की मांग पर पूछे गए सवाल को लेकर सिद्धारमैया ने कहा कि इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है। उनके इस बयान को राज्य कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीतिक हलचल के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

हालिया चुनावी नतीजों पर टिप्पणी करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि कई राज्यों में लंबे समय तक एक ही पार्टी के सत्ता में रहने के बाद एंटी-इनकंबेंसी का असर देखने को मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने जैसे कारण भी चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। तमिलनाडु के नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां युवाओं ने बदलाव की इच्छा के चलते अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन दिया, जो एक अप्रत्याशित परिणाम रहा।

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। 2025 के अंत में सरकार के ढाई साल पूरे होने के साथ ही यह मुद्दा फिर से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। 2023 में कांग्रेस की जीत के समय से ही यह संकेत दिए गए थे कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने को लेकर अनौपचारिक समझ बनी थी।

समय बीतने के साथ ही शिवकुमार समर्थकों की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी लगातार उठती रही है। हालांकि, पार्टी हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद कई बार स्थिति शांत हुई। हाल ही में शिवकुमार के दिल्ली दौरे के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई, हालांकि उन्होंने खुद स्पष्ट किया है कि पार्टी नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा, उसे वह और सिद्धारमैया दोनों स्वीकार करेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी पहले यह स्पष्ट किया था कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अभी कोई निश्चित समय तय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा था कि इस पर अंतिम निर्णय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—सोनिया गांधी, राहुल गांधी और स्वयं उनके संयुक्त विचार से लिया जाएगा।