सोना और चांदी भले ही एक बार फिर ऊंचे स्तरों पर पहुंच गए हों, लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का मानना है कि केवल इन कीमती धातुओं में निवेश करना देश और निवेशक—दोनों के लिए सीमित फायदा देता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते देश में असली संपत्ति निर्माण का रास्ता उत्पादक निवेश, खासकर शेयर बाजार से होकर जाता है।
JioBlackRock से जुड़ी पहल पर बोलते हुए अंबानी ने बताया कि बीते साल भारत ने करीब 60 अरब डॉलर का सोना और 10 से 15 अरब डॉलर की चांदी आयात की। इसका मतलब यह हुआ कि बड़ी रकम ऐसी संपत्तियों में फंसी रही, जो अर्थव्यवस्था में सीधे उत्पादन या रोजगार नहीं बढ़ातीं। उनके अनुसार, सोना-चांदी सुरक्षा तो देते हैं, लेकिन विकास को गति नहीं देते।
उन्होंने कहा कि यदि देश की बचत का बड़ा हिस्सा पूंजी बाजार में आए, तो वही धन उद्योगों, आधारभूत ढांचे और नई तकनीकों में लगेगा। इससे कारोबार फैलेंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निवेशकों को लंबे समय में कहीं बेहतर रिटर्न मिल सकता है। उनका संदेश साफ था कि धन को तिजोरी में बंद रखने के बजाय अर्थव्यवस्था में सक्रिय रूप से लगाना चाहिए।
अंबानी का यह बयान ऐसे दौर में आया है, जब वैश्विक अस्थिरता के चलते लोग फिर से सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। लेकिन उन्होंने इस सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि कीमती धातुएं मूल्य को बचा सकती हैं, जबकि शेयरों में निवेश से नया मूल्य पैदा होता है, जो वास्तविक संपत्ति निर्माण का आधार है।
उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना एक फलदार पेड़ से की और कहा कि मजबूत नीतियां, स्थिर नेतृत्व और तेज़ विकास दर इसे दुनिया के लिए आकर्षक बना रही हैं। उनके मुताबिक, भारत 8 से 10 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने और उसे लंबे समय तक बनाए रखने की क्षमता रखता है।
संक्षेप में, अंबानी ने निवेशकों को यह संकेत दिया कि डर के समय सोना खरीदना आसान है, लेकिन भविष्य गढ़ने के लिए पूंजी को सही जगह लगाना कहीं ज्यादा जरूरी है।