पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। दक्षिणी ईरान में अमेरिका की ओर से किए गए कथित हमलों की खबरों के बाद निवेशकों की धारणा कमजोर हो गई, जिससे बाजार में मुनाफावसूली और भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। सोमवार की सकारात्मक शुरुआत के बाद बाजार ने अचानक रुख बदल दिया।

बाजार का हाल

कारोबारी सत्र के अंत में दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक लाल निशान में बंद हुए—

सेंसेक्स:
बीएसई सेंसेक्स 479.26 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,009.70 पर बंद हुआ।

निफ्टी:
एनएसई का निफ्टी 118 अंक यानी 0.49 प्रतिशत टूटकर 23,913.70 के स्तर पर आ गया और 23,950 का अहम स्तर भी टूट गया।

रुपये पर दबाव

पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 47 पैसे कमजोर होकर 95.73 (अस्थायी) पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, मजबूत डॉलर और घरेलू बाजारों में कमजोरी ने भी रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया।

सेक्टोरल असर और गिरावट के कारण

बाजार में आई इस गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर निवेशकों की भावनाओं में आया अचानक बदलाव रहा।

  • सबसे ज्यादा दबाव वाले सेक्टर: बैंकिंग, तेल एवं गैस और फार्मा शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली।
  • टॉप लूजर्स: टेक महिंद्रा और अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयर लगभग 2 प्रतिशत तक टूटकर प्रमुख गिरावट वाले स्टॉक्स में शामिल रहे।

वैश्विक तनाव का असर

सोमवार को बाजार में जो रिकवरी दिखी थी, वह अमेरिका द्वारा दक्षिणी ईरान में कथित सैन्य कार्रवाई की खबरों के बाद पूरी तरह कमजोर पड़ गई। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में लंबे संघर्ष की आशंका को बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर तेल बाजार और उससे जुड़े सेक्टर्स पर पड़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसका प्रभाव भारतीय इक्विटी बाजार पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।