पश्चिम एशिया की स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई है। शुक्रवार तड़के ईरान ने बड़े पैमाने पर हमले कर अपनी शक्ति का परिचय दिया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ का 83वां चरण शुरू किया। इस हमले में ईरान ने न केवल इस्राइल को निशाना बनाया, बल्कि खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी प्रहार किया।
अशदोद में तेल डिपो और इस्राइली सैन्य ठिकानों पर हमला
एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार, IRGC ने आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स से इस्राइल के अशदोद शहर में स्थित तेल डिपो को निशाना बनाया। हमले के बाद डिपो में आग लगने की खबर है। इसके अलावा, इस्राइली सैन्य ठिकानों पर भी सटीक हमले किए गए हैं।
खाड़ी देशों में अमेरिकी अड्डों को भी निशाना बनाया गया
ईरानी मिसाइलें कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस और बहरीन के शेख ईसा बेस पर गिरीं। बहरीन के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम के रिपेयर हैंगर और जेट फ्यूल टैंकों को भारी नुकसान पहुंचा। वहीं, कुवैत और यूएई के अल-धाफरा बेस पर ईरानी ड्रोन ने सैन्य उपकरणों पर हमला किया।
नौसेना प्रमुख की मौत का बदला
पिछले दिनों रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसिरी की इस्राइली हमले में मौत के बाद ईरान ने इसका प्रतिशोध लेना शुरू किया। 28 फरवरी 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद से यह संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह तनाव जारी रहा, तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में तेल और गैस की किल्लत गहर सकती है। अमेरिका ने 6 अप्रैल तक तेल डिपो पर हमले न करने की बात कही है, लेकिन स्थिति फिलहाल नियंत्रण से बाहर दिखाई दे रही है।