नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी संघर्ष और भारत की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। एक लेख के माध्यम से उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में हो रही घटनाओं पर केंद्र सरकार की चुप्पी न केवल नैतिक दृष्टि से चिंताजनक है, बल्कि यह भारत के दीर्घकालिक कूटनीतिक हितों के अनुरूप भी नहीं दिखाई देती।
सोनिया गांधी ने कहा कि गाजा में आम नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए भारत को अधिक सक्रिय और स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है, जबकि भारत की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली।
विदेश नीति को लेकर जताई चिंता
कांग्रेस नेता ने अपने लेख में कहा कि भारत की विदेश नीति लंबे समय तक स्वतंत्रता, संप्रभुता, उपनिवेशवाद विरोध और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में इन मूल्यों से दूरी बनती हुई दिखाई दे रही है।
सोनिया गांधी के अनुसार, भारत के पश्चिम एशिया के देशों, विशेषकर फलस्तीन और ईरान के साथ पारंपरिक संबंध रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इन संबंधों में आई दूरी का असर भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीतिक भूमिका पर पड़ सकता है।
सरकार की नीति पर उठाए सवाल
अपने लेख में उन्होंने कहा कि गाजा संकट पर केंद्र सरकार ने कोई स्पष्ट और मजबूत सार्वजनिक रुख नहीं अपनाया है। उनका मानना है कि मानवीय दृष्टिकोण से भारत को संघर्ष प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और शांति प्रयासों के समर्थन में खुलकर बोलना चाहिए।
सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर शांति, संवाद और नागरिक सुरक्षा की वकालत करने की अपनी पारंपरिक भूमिका को बनाए रखना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी की इस्राइल यात्रा का भी किया उल्लेख
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलन और रणनीतिक स्वतंत्रता पर आधारित रही है। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में नीति की दिशा में बदलाव देखने को मिला है, जिसके प्रभावों पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
कांग्रेस नेताओं का समर्थन
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोनिया गांधी के लेख को साझा करते हुए कहा कि इसमें भारत की विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि लेख के माध्यम से स्वतंत्र विदेश नीति, मानवीय मूल्यों और गाजा संकट पर स्पष्ट नैतिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
सोनिया गांधी के ताजा बयान पर केंद्र सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सरकार पहले कई मौकों पर यह स्पष्ट कर चुकी है कि भारत पश्चिम एशिया में शांति, संवाद और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन की नीति पर कायम है।
सोनिया गांधी की टिप्पणियों के बाद गाजा संकट और भारत की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।