ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को दबाने के दौरान अब तक कम से कम 5,002 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में यह दशकों का सबसे बड़ा दमन माना जा रहा है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना का बड़ा बेड़ा ईरान के नजदीक पहुंच रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।
28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन लगातार हिंसक हो रहे हैं। इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल बंद होने के कारण सही जानकारी जुटाना मुश्किल हो गया है। फिर भी मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए हैं। ट्रंप ने इन घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए बताया कि अमेरिकी नौसेना का ‘आर्माडा’ क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।
मानवाधिकार रिपोर्ट: हजारों की मौत और हिरासत
मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों के अनुसार, मृतकों में 4,716 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इसके अलावा 203 सरकारी पक्ष के लोग, 43 बच्चे और 40 ऐसे नागरिक भी मारे गए जिनका प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था। लगभग 26,800 लोग हिरासत में लिए गए हैं, जो हाल के दशकों में ईरान के किसी भी आंदोलन में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति की तुलना में देखा जा रहा है।
सरकारी आंकड़े और विरोधाभास
ईरानी सरकार ने पहली बार आधिकारिक मौतों का आंकड़ा जारी किया है, जिसमें कुल 3,117 लोगों की मौत बताई गई है। इनमें 2,427 लोग नागरिक और सुरक्षाकर्मी हैं, जबकि बाकी को सरकार ने ‘आतंकी’ करार दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता इस संख्या पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि पहले भी सरकार पर मृतकों की संख्या कम दिखाने के आरोप लगते रहे हैं। राज्य टीवी प्रदर्शनकारियों को लगातार उपद्रवी बताकर अमेरिका और इज़राइल को दोषी ठहरा रहा है।
ट्रंप का बयान और सैन्य तनाव
ट्रंप ने कहा कि उनके हस्तक्षेप से 800 लोगों की फांसी रोकी गई, लेकिन ईरान के शीर्ष अभियोजक ने इसे पूरी तरह झूठा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो ऐसी कोई सूची है और न ही सामूहिक फांसी का आदेश दिया गया। इस बीच, अमेरिका ने अपने युद्धपोत और विमानवाहक पोत क्षेत्र में तैनात कर दिए हैं। ट्रंप का दावा है कि यह कदम एहतियातन है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थिति किसी भी समय और गंभीर हो सकती है।