तेहरान। ईरान की विशेषज्ञ सभा (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स) ने बुधवार को देश के नए सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा खामेनेई के नाम की घोषणा की। यह फैसला पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हालिया हवाई हमले में मौत के बाद पैदा हुए नेतृत्व संकट के बीच लिया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह चयन ऐसे समय में हुआ है जब देश युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने विभिन्न धड़ों को एकजुट कर मोजतबा के समर्थन में माहौल बनाया। चूंकि सुरक्षा हालात तनावपूर्ण थे, इसलिए विशेषज्ञ सभा की पूर्ण बैठक संभव नहीं हो सकी और निर्णय आभासी बैठकों तथा आंतरिक विमर्श के जरिए लिया गया।

मोजतबा खामेनेई की पृष्ठभूमि

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की सत्ता संरचना में प्रभावशाली माने जाते रहे हैं, हालांकि वे औपचारिक रूप से उच्च पद पर नहीं रहे। उन्हें सुरक्षा तंत्र, विशेषकर IRGC और बसिज बलों के साथ करीबी संबंधों के लिए जाना जाता है।

हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद भी उठ रहे हैं। ईरान की इस्लामी क्रांति की विचारधारा वंशानुगत नेतृत्व का समर्थन नहीं करती, और कुछ हलकों में इसे राजशाही जैसी व्यवस्था की ओर कदम बताया जा रहा है। इसके अलावा, उनकी धार्मिक रैंक को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि सर्वोच्च नेता के पद के लिए आमतौर पर उच्च धार्मिक योग्यता अपेक्षित मानी जाती है।

पृष्ठभूमि: नेतृत्व संकट

अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मौत हो गई थी। इसके बाद अस्थायी रूप से तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद ने शासन की जिम्मेदारी संभाली थी, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के एक सदस्य शामिल थे। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने संकेत दिया था कि नया नेतृत्व जल्द तय किया जाएगा।

मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति के साथ ही विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव और मजबूत हो सकता है, खासकर मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच।