वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विस्तार से अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी सफलता पूरी तरह ईरान के भविष्य के कदमों और व्यवहार पर निर्भर करेगी।
सीबीएन न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि अमेरिका अब ईरान के दावों के बजाय उसके वास्तविक कार्यों को आधार बनाकर मूल्यांकन करेगा। उनके मुताबिक, समझौते का सबसे अहम पहलू यही है कि इसमें जवाबदेही और व्यवहारिक परिणामों पर जोर दिया गया है।
वेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन लंबे समय से ईरान में प्रदर्शनकारियों के साथ हुए कथित दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व नेतृत्व के दौर में नागरिकों के साथ कठोर व्यवहार किया गया था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और अमेरिका यह देखना चाहता है कि नया नेतृत्व अपने नागरिकों के प्रति किस प्रकार का रवैया अपनाता है।
उपराष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि तेहरान का नया नेतृत्व सकारात्मक बदलावों की दिशा में कदम उठाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता, तो अमेरिका उसी आधार पर आगे की रणनीति तय करेगा।
इस समझौते को लेकर वेंस ट्रंप प्रशासन के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हस्ताक्षर के दौरान ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि समझौता सफल रहा तो उसका श्रेय वे लेंगे, लेकिन यदि यह असफल हुआ तो जिम्मेदारी जेडी वेंस पर डाल देंगे।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, वेंस ने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ मिलकर इस समझौते से जुड़ी वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
समझौते के तहत ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार में कटौती करनी होगी और यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत संचालित होगी। साथ ही, ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता भी जताई है। इस समझौते के जरिए दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत का रास्ता खुला है।
हालांकि, अमेरिका के भीतर इस समझौते को लेकर मतभेद भी सामने आने लगे हैं। कुछ रिपब्लिकन नेताओं और इजरायल समर्थक समूहों ने इसकी आलोचना की है। रूढ़िवादी टिप्पणीकार एरिक एरिकसन ने इसे अमेरिका की कमजोरी करार दिया, जबकि सीनेटर टेड क्रूज ने कहा कि राष्ट्रपति को इस मुद्दे पर गलत सलाह दी गई है।
इन आलोचनाओं के बीच वेंस लगातार समझौते का बचाव कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई आलोचक ईरान से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं से प्रभावित हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह पहल किसी लंबे सैन्य संघर्ष या इराक जैसे हालात की ओर नहीं ले जाएगी, क्योंकि वर्तमान प्रशासन की रणनीति पूरी तरह अलग है।
इसी कड़ी में जेडी वेंस शुक्रवार को स्विट्जरलैंड का दौरा करेंगे, जहां ईरान के साथ वार्ता के अगले चरण पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता वेंस के लिए भी एक अहम परीक्षा साबित हो सकता है, क्योंकि इसकी सफलता या विफलता उनके राजनीतिक भविष्य पर असर डाल सकती है।