फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोप के प्रमुख टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इवेंट ‘विवाटेक 2026’ के 10वें संस्करण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। इस वर्ष भारत को इस वैश्विक सम्मेलन में ‘AI Country Partner’ के रूप में विशेष भागीदारी मिली है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि तकनीक का असली उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक उसका लाभ पहुंचना होना चाहिए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को नए नजरिए से परिभाषित करते हुए कहा कि भारत के लिए ‘AI’ का अर्थ “ऑल इंक्लूसिव” यानी सभी को साथ लेकर चलना और सबका कल्याण सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह समझौता दोनों क्षेत्रों के आर्थिक भविष्य को नई दिशा देगा। इसके जरिए न केवल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निवेश के अवसर भी व्यापक होंगे। साथ ही टैलेंट, टेक्नोलॉजी और टूरिज्म के आदान-प्रदान को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ दोनों देशों के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पीएम मोदी ने वैश्विक निवेशकों को भारत में अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि देश दुनिया का सबसे बड़ा टैलेंट पूल है और सरकार बिजनेस नियमों को सरल बनाकर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को लगातार बेहतर कर रही है। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए भारत में 50 अरब डॉलर से अधिक की सहायता व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत दुनिया में सबसे सस्ती डिजिटल कनेक्टिविटी और किफायती ग्रीन एनर्जी उपलब्ध करा रहा है।

उन्होंने भारत की डिजिटल प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में होता है। यूपीआई भुगतान प्रणाली अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोग में आ रही है, जिसके जरिए पेरिस के एफिल टावर और एयरपोर्ट जैसे स्थानों पर भी डिजिटल भुगतान संभव हो रहा है। साथ ही डिजीलॉकर जैसी डिजिटल सार्वजनिक सेवाएं दुनिया के लिए एक मॉडल बन चुकी हैं।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने भारत की टेक नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार का काम रास्ता बनाना है, उद्योगों का काम नवाचार करना है और स्टार्टअप्स का काम बदलाव लाना है। उन्होंने वैश्विक कंपनियों और निवेशकों से भारत के साथ मिलकर काम करने की अपील की ताकि ऐसी तकनीक विकसित की जा सके जो वैश्विक जीवन को और अधिक बेहतर बना सके।