अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के भारत दौरे के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस मौके पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि भारत को किसी भी ऐसे व्यापार समझौते पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए जो देश के हितों को प्रभावित करता हो।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को “अपने मित्र” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की कोशिश से बचना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को मलेशिया जैसे देशों के रुख से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने अपने हितों के खिलाफ जाने वाले व्यापार समझौतों पर पुनर्विचार किया है।

रमेश ने दावा किया कि फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक साझा बयान जारी किया गया था, जिसे लेकर उस समय भी राजनीतिक बहस हुई थी। उनके अनुसार, प्रस्तावित समझौते में अमेरिकी निर्यात पर टैक्स में कमी और भारत द्वारा कई अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने जैसी बातें शामिल थीं। साथ ही बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाने की भी चर्चा हुई थी।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक फैसले के बाद व्यापार नीतियों में बदलाव आया, जिससे कई छूट और सहमतियां प्रभावित हुईं। इसके बाद अमेरिका की ओर से विभिन्न देशों पर अस्थायी शुल्क लगाए जाने की भी बात सामने आई, जिससे अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।

कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका इस पूरे व्यापारिक माहौल का उपयोग दबाव बनाने के लिए कर रहा है और भारत से पूर्व सहमत शर्तों पर औपचारिक हस्ताक्षर करवाने की कोशिश हो रही है। पार्टी ने इस संभावित समझौते को भारतीय किसानों और कई राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताया है।

जयराम रमेश ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अन्य देशों के साथ अमेरिका कठोर व्यापारिक रुख अपना सकता है, तो भारत के मामले में अलग व्यवहार की गारंटी क्या है। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी एकतरफा या असंतुलित समझौते से बचना चाहिए।

कुल मिलाकर, जेमिसन ग्रीर की इस यात्रा ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है, और राजनीतिक मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं।