नेपाल में सितंबर 2025 के दौरान हुए जनरेशन Z आंदोलन से जुड़े मौतों के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। नेपाल पुलिस ने शनिवार सुबह पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर गैर-इरादतन हत्या और आपराधिक लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई गृह मंत्रालय की औपचारिक शिकायत के बाद शुरू हुई जांच के तहत की गई है। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी पूर्व विशेष न्यायालय की न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले जांच आयोग की सिफारिशों के आधार पर हुई है।
जांच आयोग ने किन लोगों को जिम्मेदार ठहराया
आयोग की रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग को घटनाओं के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इन पर नेपाल की राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 के तहत आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज किया जाए। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
कैसे शुरू हुआ था जनरेशन Z आंदोलन
सितंबर 2025 में नेपाल में युवाओं के नेतृत्व वाला जनरेशन Z आंदोलन तेजी से फैल गया था। शुरुआत में यह आंदोलन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह देशभर में फैल गया।
हिंसक झड़पों में कई लोगों की मौत
8 सितंबर 2025 को काठमांडू सहित कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव हुआ था। इन झड़पों में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पूरे आंदोलन के दौरान देशभर में मरने वालों की संख्या 70 से अधिक बताई गई थी।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिसमें लाइव गोलियां चलाने तक की घटनाएं सामने आईं।
सरकार गिरने के बाद ओली ने दिया था इस्तीफा
इन घटनाओं के बाद राजनीतिक संकट गहरा गया था और अंततः केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई। बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।