नेपाल सरकार ने संघीय सिविल सेवा कानून को लेकर नया मसौदा तैयार किया है, जिसमें प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है। इस ड्राफ्ट के तहत रिटायरमेंट की उम्र 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने के साथ-साथ लोक सेवा आयोग (PSC) में प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा में कटौती का भी प्रावधान शामिल है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम संघीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक तंत्र को योग्यता व प्रदर्शन आधारित दिशा में मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
आयु सीमा में बड़ा बदलाव प्रस्तावित
मसौदे में सिविल सेवा में प्रवेश की आयु सीमा को कम करने का प्रस्ताव है। पुरुष उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 35 वर्ष से घटाकर 32 वर्ष और महिलाओं के लिए 40 वर्ष से घटाकर 35 वर्ष करने की बात कही गई है। सरकार का मानना है कि इससे युवा और अधिक ऊर्जावान प्रतिभाओं को अवसर मिलेगा।
मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, ये बदलाव लंबे समय से उठ रही मांगों और प्रशासनिक सुधार की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
प्रशासनिक सुधारों पर जोर
बिल में प्रांत स्तर पर अलग-अलग सिविल सेवा संरचना बनाने, प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू करने और वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर पूरी तरह मेरिट आधारित नियुक्तियों का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही ट्रेड यूनियनों को समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जबकि कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी।
कड़ी सेवा शर्तें और डिजिटल ट्रांसफर प्रणाली
प्रस्तावित कानून में राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही गई है। इसके अलावा, दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती से इनकार करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित रखने का भी प्रावधान है।
ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने और कर्मचारियों को सात दिनों के भीतर नई तैनाती स्थल पर रिपोर्ट करने की अनिवार्यता भी शामिल की गई है। साथ ही, एक ही पद या कार्यालय में चार साल से अधिक समय तक कार्य करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
आरक्षण व्यवस्था में भी बदलाव करते हुए इसे सीमित करने की बात कही गई है, जिसके तहत इसका लाभ केवल एक बार नॉन-गजेटेड और एक बार गजेटेड स्तर पर ही लिया जा सकेगा, जिसकी निगरानी केंद्रीय रिकॉर्ड सिस्टम से होगी।
चौथी बार तैयार हुआ मसौदा
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के कार्यभार संभालने के बाद तय किए गए एक्शन प्लान के तहत 45 दिनों की समयसीमा में इस मसौदे को एक महीने के भीतर तैयार किया गया है। इससे पहले भी 2017, 2022 और 2024-25 में ऐसे विधेयक लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन राजनीतिक सहमति और अन्य कारणों से यह पारित नहीं हो सके।
सरकार का पक्ष
‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री प्रतिभा रावल ने कहा कि यह प्रस्ताव एक मजबूत और योग्यता-आधारित सिविल सेवा प्रणाली विकसित करने पर केंद्रित है, जिसमें मेरिट और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे संघीय शासन प्रणाली को मजबूती मिलेगी और तीनों स्तरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
सरकार अब इस मसौदे को कैबिनेट में चर्चा के बाद संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो नेपाल में लंबे समय से लंबित संघीय सिविल सेवा ढांचा लागू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।