नई दिल्ली। देश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों के भीतर ऐसे बदलाव देखने को मिले हैं, जिनका असर आगामी मानसून सत्र में संसद के समीकरणों पर साफ दिखाई दे सकता है। सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन और परिसीमन बिल को दोबारा पेश करने की तैयारी में है।
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल में यह अहम विधेयक लोकसभा में बहुमत से कुछ वोट कम रहने के कारण पारित नहीं हो सका था। उस समय विपक्ष की एकजुटता ने सरकार के लिए रास्ता मुश्किल कर दिया था, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
बदलते राजनीतिक हालात का असर
सूत्रों के अनुसार, हालिया राजनीतिक घटनाक्रम—विशेषकर विभिन्न क्षेत्रीय दलों में उथल-पुथल और नेतृत्व को लेकर असंतोष—ने संसद में ताकत का संतुलन प्रभावित किया है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जहां कुछ सांसदों के अलग रुख अपनाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
इन बदलावों का सीधा असर संसद में संख्या बल पर पड़ सकता है, जिससे सरकार के लिए विधेयक पारित कराने की स्थिति पहले की तुलना में अधिक अनुकूल मानी जा रही है।
लोकसभा का वर्तमान गणित
543 सदस्यीय लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए लगभग 360 वोटों की जरूरत होती है। मौजूदा स्थिति में एनडीए और उसके सहयोगी दलों के पास मिलाकर संख्या पहले की तुलना में मजबूत बताई जा रही है। वहीं विपक्षी खेमे में भी क्षेत्रीय दलों के रुख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुछ क्षेत्रीय दल सरकार के साथ आते हैं या तटस्थ रहते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा हासिल करना सरकार के लिए अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
राज्यसभा में भी नजर बहुमत पर
राज्यसभा में भी सरकार का ध्यान दो-तिहाई बहुमत पर है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार एनडीए को अभी भी कुछ अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता है। यदि कुछ क्षेत्रीय दलों का सहयोग मिलता है, तो वहां भी सरकार का समीकरण मजबूत हो सकता है।
आगे की रणनीति पर नजर
सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाया जाए। इसके अलावा कुछ अन्य बड़े सुधारों पर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि अंतिम तस्वीर संसद सत्र के दौरान ही साफ होगी, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए सरकार के लिए परिस्थितियां पहले से अधिक अनुकूल मानी जा रही हैं।