वेनेजुएला में भारतीय नाविक राकेश चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर को भारत भेजे जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों और नाविक संगठन ने मामले में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, राकेश चौहान की मौत के बाद उनका शव उत्तर प्रदेश स्थित उनके गृह जनपद भेजा गया, लेकिन इस दौरान कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट साझा नहीं की गई। इसके बाद फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताते हुए जांच की मांग तेज कर दी है।
भारत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर बड़ा दावा
FSUI के अनुसार, भारत में कराए गए पोस्टमार्टम में यह दावा सामने आया कि शव के भीतर कई महत्वपूर्ण आंतरिक अंग मौजूद नहीं थे। रिपोर्ट में बताया गया कि दिमाग, हृदय, दोनों फेफड़े, लिवर, किडनी, प्लीहा, अग्न्याशय, पेट, आंतें, थायराइड, लैरिंक्स और ट्रेकिया जैसे अंग अनुपस्थित पाए गए।
शरीर पर मिले कई टांकों के निशान
संगठन का यह भी कहना है कि शव पर कई जगहों पर पहले से टांके लगे हुए थे। जानकारी के अनुसार गर्दन से प्यूबिक क्षेत्र तक लगभग 22 टांके और कान से कान तक करीब 21 टांकों के निशान पाए गए। हालांकि रिपोर्ट में किसी स्पष्ट एंटीमॉर्टम चोट के प्रमाण नहीं मिले। यह भी कहा गया है कि शव को करीब एक महीने तक डीप फ्रीजर में रखा गया था, जिससे जांच और जटिल हो गई।
जांच और दूतावास से हस्तक्षेप की मांग
मामले के सामने आने के बाद FSUI ने वेनेजुएला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
इसके साथ ही भारतीय दूतावास से तत्काल हस्तक्षेप करने, विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने और मौत की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा करने की अपील की गई है। संगठन ने परिवार को न्याय और उचित मुआवजा दिलाने की भी मांग रखी है।