नई दिल्ली। भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक ने लेबनान में जारी संघर्ष के बीच शांति बहाली और पुनर्निर्माण को लेकर कूटनीतिक प्रयासों को और मजबूत करने पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत तैनात मेजर बराक ने कहा कि स्थायी शांति के लिए बातचीत और युद्धविराम का जारी रहना बेहद जरूरी है।

“सिर्फ ढांचा नहीं, मनोवैज्ञानिक पुनर्निर्माण भी जरूरी”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेजर बराक ने कहा कि संघर्ष खत्म होने के बाद केवल सड़कों और इमारतों का पुनर्निर्माण ही नहीं, बल्कि युद्ध से प्रभावित लोगों के मानसिक और भावनात्मक घावों को भरना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में कूटनीतिक प्रयासों के जरिए बातचीत आगे बढ़ेगी और युद्धविराम कायम रहेगा, जिससे समुदायों के पुनर्निर्माण का रास्ता खुलेगा।

UN में मिला ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ सम्मान
मेजर अभिलाषा बराक को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा वर्ष 2025 का ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड प्रदान किया गया। उन्हें अग्रिम मोर्चे पर महिलाओं और लड़कियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सराहा गया।

लेबनान में UN मिशन में अहम भूमिका
मेजर बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत भारतीय बटालियन में एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में तैनात हैं। यह मिशन दक्षिणी लेबनान में कार्यरत है, जहां क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।

यह संयुक्त राष्ट्र के सबसे चुनौतीपूर्ण शांति अभियानों में से एक माना जाता है, जिसमें हाल के महीनों में कई शांति सैनिकों की जान भी गई है।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस
मेजर बराक ने बताया कि उनके कार्य का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों, खासकर महिलाओं और किशोरियों के साथ संवाद स्थापित करना रहा है। कई जगहों पर महिलाएं पुरुष शांति सैनिकों के साथ बातचीत करने में सहज नहीं थीं, ऐसे में अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए उन्हें जोड़ा गया।

उन्होंने महिलाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, फिटनेस गतिविधियां और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

भारत की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट
मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं। उन्होंने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के रूप में भी सेवाएं दी हैं। संयुक्त राष्ट्र मिशन में उनका योगदान महिलाओं के सशक्तिकरण और शांति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।