यरुशलम। गाजा पट्टी में जारी इजरायली हमलों और जवाबी गोलाबारी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। शुक्रवार को हुए हमलों में 57 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए युद्धविराम प्रस्ताव पर हमास ने अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है।

खबरों के अनुसार, हमास इस प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं पर सहमत नहीं है और चर्चा की मांग कर रहा है। हालांकि ट्रंप ने चेतावनी दी है कि रविवार शाम (वॉशिंगटन समयानुसार) तक अगर हमास इस योजना को स्वीकार नहीं करता, तो इजरायल को पूर्ण ताकत से कार्रवाई की अनुमति दी जाएगी। उनका कहना है कि दुनिया के अधिकांश देश इस पहल का समर्थन कर चुके हैं और अब यह हमास के लिए अंतिम मौका है।

प्रस्ताव की शर्तें और विवाद
योजना के मुताबिक, हमास को इजरायल के पास मौजूद 48 बंधकों को रिहा करना होगा, जिसके बदले इजरायल को गाजा पर अपने हमले रोकने होंगे। लेकिन लगभग दो साल से जारी इस युद्ध में फिलहाल किसी सकारात्मक समाधान की संभावना नहीं दिख रही है। हमास का मानना है कि यह शांति समझौता वास्तव में उसके अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है।

हमास से बातचीत में शामिल मध्यस्थ देशों कतर और मिस्र ने भी कहा है कि प्रस्ताव इजरायल के पक्ष में झुका हुआ है और इसमें स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना का कोई उल्लेख नहीं है। यही वजह है कि हमास इसमें बदलाव चाहता है।

भारी जनहानि और खाद्य संकट
अब तक इस संघर्ष में 66 हजार से अधिक फिलिस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं। गाजा सिटी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में लगातार लड़ाई चल रही है और भोजन की आपूर्ति हफ्तों से ठप है। कई लोग भुखमरी के कारण भी मर रहे हैं।

गाजा तक भोजन पहुँचाने की गैर-सरकारी कोशिश भी असफल रही। खाद्यान्न ले जा रहे 42 जहाजों के काफिले को इजरायली नौसेना ने रोक लिया और अंतिम जहाज को अशदोद बंदरगाह ले जाया गया। इसमें शामिल 450 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से कुछ को वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस मानवीय अभियान को बलपूर्वक रोकने के लिए इजरायल की आलोचना की जा रही है। आयोजकों का कहना है कि भूख से पीड़ित लोगों तक मदद पहुँचाने से रोकना अमानवीय कदम है। इस काफिले में स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग सहित कई नामी लोग भी शामिल थे।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने ट्रंप की शांति योजना पर आपत्ति जताई है। उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि यह प्रस्ताव उन शर्तों पर आधारित नहीं है जिन पर मुस्लिम देशों के नेताओं की सितंबर में न्यूयॉर्क में हुई बैठक में सहमति बनी थी। उस बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे।

डार के अनुसार, मुस्लिम देशों ने इजरायली सेना की गाजा से पूरी तरह वापसी की मांग की थी, जबकि ट्रंप की योजना में केवल चरणबद्ध वापसी की बात कही गई है और उसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। साथ ही, वेस्ट बैंक को इजरायल में शामिल न करने की शर्त भी मुस्लिम देशों ने रखी थी, लेकिन ट्रंप के 20 सूत्रीय प्रस्ताव में इसका जिक्र नहीं है।