पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ईद की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कतर के साथ मजबूती से खड़ा है और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। बातचीत के बाद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए भी जानकारी साझा करते हुए ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की।

पीएम मोदी ने कतर सरकार का आभार जताया कि वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा हालात जल्द सामान्य होंगे और क्षेत्र में स्थिरता लौटेगी।

उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। ऐसे में यहां निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

भारत और कतर के बीच ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में गहरे संबंध हैं। कतर भारत को एलएनजी का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, इसलिए पश्चिम एशिया में तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि भारत लगातार इस क्षेत्र के देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है।

कतर में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक कार्यरत हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर भी विशेष रूप से बातचीत की।

गौरतलब है कि हाल के समय में प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई, ओमान और कुवैत सहित कई देशों के नेताओं से भी चर्चा की है। इन संवादों में क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि भारत पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीबी नजर रखते हुए सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है।