बांग्लादेश में युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। राजधानी ढाका सहित कई शहरों में भीड़ ने आगजनी और तोड़फोड़ की, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। इस बीच देश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने शुक्रवार को नागरिकों से संयम बरतने और हिंसक गतिविधियों से दूर रहने की अपील की।

अंतरिम सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कुछ असामाजिक तत्व हालात बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिनका हर नागरिक को विरोध करना चाहिए। बयान में हिंसक घटनाओं के दौरान एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या की कड़ी निंदा की गई और भरोसा दिलाया गया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि ‘नए बांग्लादेश’ में हिंसा और अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं है।

स्थानीय समाचार पोर्टल ‘बांग्ला ट्रिब्यून’ के अनुसार, मयमनसिंह शहर में कथित ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास नामक हिंदू नागरिक की भीड़ ने हत्या कर दी और बाद में उसके शव को जला दिया। मुख्य सलाहकार की मीडिया टीम ने कहा कि हिंसा, धमकी, आगजनी और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।

हालांकि शुक्रवार को दिनभर किसी नई हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली, लेकिन गुरुवार रात प्रदर्शनकारियों ने ढाका में शेख मुजीबुर रहमान के आवास की पहले से क्षतिग्रस्त इमारत में तोड़फोड़ की। इसके अलावा राजधानी में दो प्रमुख अखबारों के दफ्तरों में आगजनी की गई। चटगांव में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर भी पथराव किया गया। हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज कर 12 लोगों को हिरासत में लिया।

अंतरिम सरकार ने मीडिया संस्थानों पर हमलों को स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला बताया और इसे देश की लोकतांत्रिक प्रगति के लिए गंभीर खतरा करार दिया। बयान में कहा गया कि देश एक अहम लोकतांत्रिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और इसे अराजकता फैलाने वालों के हाथों पटरी से उतरने नहीं दिया जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी आम चुनाव और जनमत संग्रह केवल औपचारिक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी हैं। उल्लेखनीय है कि 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों के उम्मीदवार शरीफ उस्मान हादी पर हमले के छह दिन बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। हादी पिछले साल हुए जुलाई विद्रोह के प्रमुख चेहरों में शामिल थे, जिसके बाद शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं और फिलहाल वहीं रह रही हैं।