ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट पर व्हाइट हाउस ने कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी कथित मसौदे को पूरी तरह फर्जी और आधारहीन बताया है।

व्हाइट हाउस के संचार मंच ‘Rapid Response 47’ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरानी मीडिया द्वारा प्रसारित जानकारी तथ्यों पर आधारित नहीं है। बयान में साफ कहा गया कि जिस समझौता ज्ञापन (MoU) का दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह मनगढ़ंत है और उस पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

ईरानी मीडिया के दावे

ईरान के सरकारी प्रसारक द्वारा जारी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को एक महीने के भीतर सामान्य किया जाएगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करेगा और नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है। इसके अलावा ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में जहाजों की निगरानी ओमान के सहयोग से किए जाने का भी उल्लेख था।

दावों के मुताबिक, यह व्यवस्था गैर-सैन्य जहाजों पर लागू होगी और किसी भी कदम से पहले ठोस सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता होता है तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तहत बाध्यकारी रूप दिया जा सकता है। हालांकि, इस कथित मसौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कोई उल्लेख नहीं था।

ट्रंप का बयान और अमेरिकी रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान शुरुआत में बातचीत को लंबा खींचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब वह समझौते के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

ट्रंप के अनुसार बातचीत अभी पूरी तरह संतोषजनक स्थिति में नहीं है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि आगे प्रगति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समझौता नहीं होता है तो विकल्प खुले रहेंगे।

बातचीत की मौजूदा स्थिति

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि बातचीत को अंतिम रूप देने में अभी कुछ समय और लग सकता है। वहीं ट्रंप प्रशासन का दावा है कि समझौते की संभावना बनी हुई है।

वार्ता में सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और उसकी सुरक्षा व्यवस्था है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा ईरान के परमाणु ढांचे को लेकर मतभेद भी बरकरार हैं।

तनाव की आशंका बरकरार

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक के लिए कैंप डेविड में अपनी कैबिनेट से चर्चा कर सकते हैं।

हालांकि ट्रंप ने पहले दावा किया था कि समझौता करीब है, लेकिन स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि वार्ता विफल होती है तो सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने क्षेत्र में कुछ सैन्य गतिविधियों की पुष्टि की है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में संघर्ष विराम अब भी कायम है।