दिल्ली। सरकार ने देश में मानसून की स्थिति और खरीफ फसलों पर पड़ रहे असर को देखते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की है। जून महीने में कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश और संभावित सूखे जैसी परिस्थितियों को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मौजूदा हालात का आकलन किया और जरूरी तैयारियों को लेकर निर्देश जारी किए।

बैठक में गृह मंत्री ने सभी संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया, ताकि किसानों को समय पर सही कृषि सलाह मिल सके और खरीफ बुवाई प्रभावित न हो।

बारिश में गिरावट और अल नीनो का असर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून में देशभर में औसतन करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मध्य भारत में स्थिति और अधिक गंभीर रही, जहां वर्षा में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गई। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि जुलाई में भी बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

अल नीनो की संभावित स्थिति को देखते हुए सरकार ने जल संसाधनों, बिजली आपूर्ति और कृषि रणनीति पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

खरीफ बुवाई पर असर

कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा है। 25 जून तक खरीफ का कुल रकबा घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 23 प्रतिशत कम है। बैठक में गृह मंत्री ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और राज्यों के साथ मिलकर किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त फसल चुनने की सलाह दी जा रही है।

जल और बिजली प्रबंधन पर फोकस

बैठक में जल संसाधन विभाग को देशभर के जलाशयों के स्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही कम पानी में उगने वाली फसलों जैसे मोटे अनाज, दालें और चारे की खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

बिजली विभाग को किसानों और आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने यह भी बताया कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं।

आपदा प्रभावित राज्यों पर कार्रवाई

हाल ही में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित असम और अरुणाचल प्रदेश में नुकसान के आकलन के लिए अंतर-मंत्रालयी टीम भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। असम के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, जबकि अरुणाचल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ है।

बैठक में कौन-कौन शामिल रहा

इस समीक्षा बैठक में कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, जैसे जल संसाधन, बिजली, ग्रामीण विकास, पर्यावरण, मत्स्य पालन और कृषि क्षेत्र से जुड़े विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा मौसम विभाग, केंद्रीय जल आयोग और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।

अल नीनो क्या है

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के सतही तापमान में बदलाव होता है। इसका असर वैश्विक मौसम पर पड़ता है और अक्सर यह वर्षा में कमी तथा तापमान में वृद्धि का कारण बन सकता है, जबकि इसका विपरीत चरण ला नीना अपेक्षाकृत ठंडा और अधिक वर्षा वाला मौसम लाता है।