नई दिल्ली में कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि देश में लोकतंत्र पर सबसे बड़ा खतरा मौजूदा केंद्र सरकार की नीतियों से उत्पन्न हो रहा है। पार्टी का यह बयान उस समय सामने आया है जब कई विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।

सीजेआई को लिखे पत्र में विपक्ष की चिंता

विपक्षी दलों के नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक सामूहिक पत्र भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि जब संस्थागत ढांचे काम करना बंद कर देते हैं तो लोकतंत्र अव्यवस्था की ओर बढ़ता है, और यदि न्यायपालिका भी प्रभावी रूप से काम न करे तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे का संकेत होता है।

पत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की गई है। साथ ही सुझाव दिया गया है कि इसे तब लागू किया जाए जब अगले विधानसभा चुनावों में कम से कम पांच साल का समय हो। विपक्ष ने केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया है और जरूरत पड़ने पर मतदान प्रक्रिया को फिर से लागू करने पर विचार करने की बात कही है।

कांग्रेस का केंद्र सरकार पर आरोप

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस पत्र को साझा करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और न्याय सुनिश्चित करे।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश के चुनावी लोकतंत्र को मौजूदा सरकार की नीतियों से गंभीर खतरा है। वेणुगोपाल के अनुसार, 28 जून को 24 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भी सीजेआई को पत्र लिखकर एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की भूमिका लोकतंत्र को कार्यपालिका के दुरुपयोग से बचाने में अहम है, खासकर तब जब संवैधानिक ढांचे पर सवाल उठने लगें।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर जोर

वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का दायित्व है कि वह चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि बिना पारदर्शी और स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया के करोड़ों मतदाताओं का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का उद्देश्य न्यायपालिका पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

विपक्षी एकजुटता का दावा

तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पहली बार है जब INDIA ब्लॉक की बैठकों के बाद विपक्षी दलों ने किसी संयुक्त पत्र या दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं।

विपक्षी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न्यायपालिका की आलोचना करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यदि संस्थाएं कमजोर पड़ती हैं तो लोकतंत्र की रक्षा के लिए अंतिम उम्मीद के रूप में अदालतें मजबूत बनी रहें।