भोपाल में शुक्रवार को अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर कांग्रेस की महिला इकाई ने विरोध दर्ज कराया। माता मंदिर के पास आयोजित कार्यक्रम में सद्बुद्धि यज्ञ और सामूहिक उपवास किया गया। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेतिया सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ का दावा

महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेतिया ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री की सद्बुद्धि के लिए किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में आम जनता, महिलाएं और गरीब वर्ग कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि सरकार धार्मिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम हमेशा जनकल्याण के प्रतीक रहे हैं।

दिग्विजय सिंह का चंदे को लेकर बयान

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपये का चंदा दिया था, जिसकी रसीद और चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उन्होंने घोषणा की कि वे 5 या 6 जुलाई को अपने वकील से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में वाद दायर करेंगे।

जांच और पारदर्शिता की मांग

दिग्विजय सिंह ने मांग की कि चंदा संग्रह में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा आस्था के साथ दी गई राशि का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में गड़बड़ी साबित होती है, तो वे अपना चंदा वापस लेकर उसे किसी अन्य धार्मिक न्यास या शंकराचार्य के संस्थान को दान करेंगे।

अपनी धार्मिक आस्था का दिया हवाला

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन पर अक्सर धर्म विरोधी होने के आरोप लगाए जाते हैं, जबकि वह स्वयं सनातन परंपरा का पालन करते हैं। उन्होंने बताया कि वे नियमित धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, एकादशी का व्रत रखते हैं और नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके हैं।

इसके साथ ही उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर भी धार्मिक चंदे और गुरुदक्षिणा के उपयोग को लेकर पारदर्शिता की मांग उठाई। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं के संचालन में जवाबदेही को जरूरी बताया।

राम मंदिर ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट के गठन, पदाधिकारियों की नियुक्ति और प्राण प्रतिष्ठा प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर कई संत और शंकराचार्य पहले ही आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने घर के बाहर एक बोर्ड लगाएंगे, जिसमें लिखा होगा कि “चंदा चोरी करने वालों का प्रवेश वर्जित है”। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक संस्थानों में दान की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।