कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे तुष्टिकरण के आरोपों को खारिज करते हुए खुद को सच्चे अर्थों में धर्मनिरपेक्ष बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सभी धर्मों और समुदायों के साथ समान व्यवहार करती है और यही उनकी राजनीति की मूल सोच है।

‘दुर्गा आंगन’ कार्यक्रम में बोलते हुए ममता ने कहा, “कई लोगों ने मुझ पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया, लेकिन मैं सेक्युलर हूं। मुझे बंगाल और भारत से गहरा प्यार है। हम हर जाति और धर्म के लोगों से समान प्रेम रखते हैं। हर नागरिक को अपना लोकतांत्रिक अधिकार है। धर्म व्यक्तिगत पसंद है, लेकिन त्यौहार सभी के लिए हैं। जब मैं गुरुद्वारे जाती हूं तो कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन ईद जैसे कार्यक्रमों में शामिल होने पर कुछ लोगों को दिक्कत होती है।”

मुख्यमंत्री ने सोमवार को दुर्गा आंगन की आधारशिला रखी और बताया कि यह कार्यक्रम बंगाल और उसके लोगों को समर्पित है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों के लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने इस सहयोग के लिए सभी का धन्यवाद किया। ममता ने बताया कि दुर्गा आंगन के निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया है और परियोजना पूरी होने पर राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि बंगाल के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।

केंद्र सरकार पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि गंगासागर में पुल निर्माण के प्रयास लंबे समय से हो रहे थे, लेकिन अब राज्य सरकार स्वयं इसे आगे बढ़ाएगी। उन्होंने घोषणा की कि पुल की नींव 5 जनवरी को रखी जाएगी और अगले दो साल में इसे जनता के लिए खोला जाएगा। इसके अलावा, जनवरी के दूसरे सप्ताह में सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी।

एसआईआर प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए ममता ने कहा कि इस प्रक्रिया में लोग बेवजह परेशान हो रहे हैं और एक महीने में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि वह लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार लड़ेंगी और इसके लिए जान देने को भी तैयार हैं।