प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राजधानी में बने नए प्रशासनिक परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का लोकार्पण किया। इस परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय के लिए आधुनिक भवन तैयार किए गए हैं, जिन्हें ‘कर्तव्य भवन-1’ और ‘कर्तव्य भवन-2’ नाम दिया गया है। उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 13 फरवरी का दिन भारत की विकास यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने विजया एकादशी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शुभ अवसर पर लिया गया संकल्प सफलता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है और आज देश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ इस नए परिसर में प्रवेश कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां कभी साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें औपनिवेशिक शासन की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं, वहीं अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे परिसर देश की जनता की आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर तैयार किए गए हैं। उनके अनुसार यहां से लिए जाने वाले निर्णय किसी शासक वर्ग के नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों की अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने इन भवनों को देशवासियों को समर्पित करते हुए इसे नई कार्यसंस्कृति का प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 21वीं सदी का पहला चरण पूरा होने के साथ ही भारत को अपने प्रशासनिक ढांचे में भी आधुनिकता और दक्षता लानी होगी। उनका कहना था कि विकसित भारत का विज़न केवल नीतियों तक सीमित न रहकर कार्यस्थलों की संरचना और माहौल में भी दिखना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अब तक दिल्ली में कई मंत्रालय अलग-अलग स्थानों से संचालित हो रहे थे, जिन पर हर साल लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये किराये के रूप में खर्च होते थे। साथ ही हजारों कर्मचारियों की आवाजाही में समय और संसाधन भी लगते थे। नए परिसर से इन खर्चों में कमी, समय की बचत और कार्यक्षमता में वृद्धि की उम्मीद जताई गई।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि करीब एक सदी पुराने भवनों में जगह और सुविधाओं की सीमाएं थीं और संरचनात्मक चुनौतियां भी सामने आ रही थीं। प्रधानमंत्री के अनुसार, विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए देश को औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतीकों से बाहर निकलकर नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा।